





पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सियासी जंग अब अपने सबसे दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गई है। आज, 30 मार्च 2026 को भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। नामांकन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं का भारी उत्साह देखने को मिला और पार्टी के कई केंद्रीय व राज्य स्तरीय नेता भी इस मौके पर मौजूद रहे।



शुभेंदु अधिकारी का दोहरा दांव:-

इस चुनाव में भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत शुभेंदु अधिकारी को दो सबसे महत्वपूर्ण सीटों से मैदान में उतारा है। पहली सीट नंदीग्राम है, जहाँ पिछले चुनाव में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक बेहद करीबी और कड़े मुकाबले में मात दी थी। वहीं, दूसरी सीट भवानीपुर है, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। शुभेंदु को भवानीपुर से उतारकर भाजपा ने सत्ताधारी दल को उनके अपने गढ़ में ही बड़ी चुनौती देने का प्रयास किया है।
ममता बनर्जी की घेराबंदी और टीएमसी की रणनीति:-
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या ममता बनर्जी इस बार केवल एक ही सीट पर ध्यान केंद्रित करेंगी या फिर नंदीग्राम के पिछले परिणामों को देखते हुए अपनी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव करेंगी। तृणमूल कांग्रेस का पूरा खेमा इस समय ‘दीदी’ की जन-कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को आधार बनाकर जनता के बीच जा रहा है।
चुनावी माहौल और मुख्य मुद्दे:-
नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता इस बार भ्रष्टाचार और अराजकता के खिलाफ वोट देने का मन बना चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि नंदीग्राम की तरह ही भवानीपुर में भी इस बार परिवर्तन देखने को मिलेगा।
बंगाल के इस चुनावी दंगल में मुख्य मुकाबला रोजगार, कानून-व्यवस्था और स्थानीय विकास के मुद्दों पर केंद्रित होता दिख रहा है। अप्रैल और मई के महीनों में होने वाले विभिन्न चरणों के मतदान यह तय करेंगे कि बंगाल की जनता एक बार फिर ममता बनर्जी पर भरोसा जताती है या शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा को सत्ता की चाबी सौंपती है।






