





पश्चिम बंगाल की खड़गपुर सदर विधानसभा सीट पर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार प्रदीप सरकार के नामांकन के दौरान आयोजित एक विशाल रैली ने क्षेत्र में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इस दौरान भाजपा और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।



शक्ति प्रदर्शन के साथ नामांकन:

प्रदीप सरकार के समर्थन में आयोजित इस रैली में मेदिनीपुर लोकसभा क्षेत्र की सांसद जून मालिया विशेष रूप से शामिल हुईं। वे बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ प्रदीप सरकार का नामांकन पत्र जमा करवाने पहुंचीं। रैली में कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी के जरिए तृणमूल कांग्रेस ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
दिलीप घोष का पलटवार:
इस रैली और जून मालिया की मौजूदगी पर भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सांसद पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद जून मालिया एक बार भी खड़गपुर के लोगों से मिलने नहीं आईं।
दिलीप घोष ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सवाल उठाए:
•जनता की अनुपस्थिति: उन्होंने आरोप लगाया कि जब ‘पूरी गेट’ इलाके में रेलवे द्वारा गरीबों के घर और दुकानें खाली करने के नोटिस दिए गए थे, तब सांसद कहीं नजर नहीं आईं।
•विकास के मुद्दे: घोष ने शहर में जलभराव (Waterlogging), सड़कों की खराब स्थिति और अस्पतालों की अव्यवस्था को लेकर सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के ड्रेन और कचरे के प्रबंधन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
•भय की राजनीति: दिलीप घोष ने दावा किया कि सत्ता पक्ष के लोग जनता को डरा-धमका रहे हैं, जबकि उन्होंने पिछले कई वर्षों से लोगों के घरों को टूटने से बचाया है।
चुनावी मुकाबला रोचक:
जहाँ एक तरफ टीएमसी अपनी रैलियों और सांगठनिक मजबूती के भरोसे मैदान में है, वहीं दिलीप घोष स्थानीय मुद्दों और विकास की कमी को हथियार बनाकर सरकार को घेर रहे हैं। घोष ने विश्वास जताया कि वे इस बार भी भारी अंतर से जीत हासिल करेंगे।
खड़गपुर की राजनीति अब पूरी तरह से स्थानीय समस्याओं और नेतृत्व की जवाबदेही पर केंद्रित होती दिख रही है।









