खड़गपुर: रेशमी मेटालिक्स का प्रदूषण बना चुनावी मुद्दा, भाजपा और तृणमूल में वार-पलटवार

March 31, 2026 1:33 PM

पश्चिम बंगाल के खड़गपुर शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में रेशमी मेटालिक्स कंपनी से निकलने वाला काला धुआं अब केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, प्रदूषण की इस समस्या ने खड़गपुर ग्रामीण (228) और खड़गपुर सदर (224) विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी तेज कर दी है।

प्रदूषण से बेहाल जनजीवन:-

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले काले धुएं और कोयले की धूल के कारण क्षेत्र के पेड़-पौधे नष्ट हो रहे हैं। सर्दियों के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब दोपहर के बाद पूरा इलाका धुंध की चादर में लिपट जाता है।

क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं:

•सांस की बीमारियाँ: लोग दमा और सांस लेने में कठिनाई की शिकायत कर रहे हैं।

•गंभीर रोग: स्थानीय स्तर पर टीबी (तपेदिक) और कैंसर जैसे रोगों के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप:

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस मुद्दे पर एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

भाजपा का पक्ष:

खड़गपुर ग्रामीण से भाजपा प्रत्याशी तपन भुइयां और खड़गपुर सदर से दिलीप घोष ने सत्तारूढ़ दल पर कड़े प्रहार किए हैं।

•दिलीप घोष का आरोप है कि तृणमूल के नेता और पार्षद उद्योगपतियों से पैसा लेकर प्रदूषण के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।

•भाजपा का वादा है कि यदि उनकी सरकार आती है, तो वे आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदूषण को नियंत्रित करेंगे और नए उद्योगों के साथ स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करेंगे।

तृणमूल कांग्रेस का जवाब:

खड़गपुर सदर से तृणमूल प्रत्याशी प्रदीप सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

•सरकार का कहना है कि जो भाजपा नेता आज प्रदूषण पर सवाल उठा रहे हैं, वे खुद इन उद्योगपतियों के साथ उठते-बैठते हैं।

•उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी कंपनी के खिलाफ नहीं हैं क्योंकि ये उद्योग हजारों लोगों को रोजगार देते हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

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