





कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने अपने प्रशासनिक सफर की शुरुआत करते हुए मंत्रिमंडल के विभागों का प्रारंभिक बंटवारा पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए इस विस्तार में पारदर्शिता, प्रशासनिक सुधार और ‘विकेंद्रीकरण’ की स्पष्ट झलक देखने को मिल रही है। नई कैबिनेट को ‘स्लिम एंड ट्रिम’ रखने के उद्देश्य से अनुभवी नेताओं को कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।



प्रमुख मंत्रियों के विभागों का विवरण
प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण विभागों का बंटवारा इस प्रकार किया गया है:

- दिलीप घोष: इन्हें राज्य के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ‘पंचायत एवं ग्रामीण विकास’ विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही वे ‘पशुपालन विकास’ मंत्रालय का कार्यभार भी संभालेंगे।
- अग्निमित्रा पॉल: इन्हें ‘महिला एवं बाल कल्याण और समाज कल्याण’ विभाग का प्रभार दिया गया है। साथ ही, वे ‘नगर विकास’ (Urban Development) मंत्री के रूप में शहरी बुनियादी ढांचे की कमान संभालेंगी।
- निशिथ प्रमाणिक: उत्तर बंगाल की प्रगति को प्राथमिकता देते हुए उन्हें ‘उत्तर बंगाल विकास’ और ‘युवा कल्याण’ विभाग का दायित्व सौंपा गया है।
- अशोक कीर्तनिया: राज्य की खाद्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उन्हें ‘खाद्य मंत्री’ नियुक्त किया गया है।
- खुदीराम टुडू: आदिवासियों के उत्थान और कल्याण के लिए इन्हें ‘आदिवासी कल्याण एवं विकास’ विभाग का कार्यभार दिया गया है।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति
सरकार गठन के तुरंत बाद हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित विधायकों और जिला अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा, कोयला और रेत जैसे क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में लंबित जांचों में तेजी लाएं। अगले एक महीने के भीतर इन कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए एक ‘रिव्यू मीटिंग’ भी बुलाई जाएगी।
प्रशासनिक सुधार और नया विजन
इस बार के मंत्रिमंडल गठन में किसी भी प्रकार के पुराने ‘कोटा सिस्टम’ या क्षेत्रीय प्रभाव के बजाय योग्यता और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्वयं दर्जनों विभाग अपने पास रखने के बजाय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है, ताकि प्रत्येक विभाग स्वतंत्र रूप से और तेजी से कार्य कर सके।
सरकार का लक्ष्य है कि अगले 30 दिनों के भीतर शासन की एक नई और पारदर्शी छवि जनता के सामने पेश की जाए।





