





कोलकाता: नगर निकाय भर्ती घोटाले (Municipal Recruitment Scam) की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को विशेष अदालत में प्रभावशाली राजनेता सुजीत बोस की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य पेश किए। ईडी के वकील धीरज त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान ऐसे संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करते हैं।



लॉकडाउन में ‘ढाबा’ बंद, फिर भी करोड़ों की बिक्री

अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी ने दावा किया कि कोविड-19 लॉकडाउन के समय, जब सभी रेस्तरां और ढाबे पूरी तरह बंद थे और कर्मचारी अपने घर जा चुके थे, तब भी सुजीत बोस से जुड़े ‘बंगाल ढाबा’ और एक चाइनीज कुजीन रेस्तरां में 1.11 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बिक्री दिखाई गई है। ईडी का आरोप है कि यह राशि वास्तव में भ्रष्टाचार के जरिए कमाए गए काले धन को सफेद (Money Laundering) करने का एक जरिया थी।
रियल एस्टेट और मुखौटा कंपनियों में निवेश के आरोप
जांच एजेंसी ने कोर्ट को सूचित किया कि भ्रष्टाचार से प्राप्त अवैध धन को रियल एस्टेट और विभिन्न बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया है। ईडी के अनुसार:
स्वभूमि प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
कई फर्जी या मुखौटा (Shell Companies) कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये बैंक खातों में जमा किए गए हैं।
सुजीत बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की जांच में भी भारी नकदी जमा होने के प्रमाण मिले हैं।
भर्ती घोटाले से जुड़े तार
ईडी ने कोर्ट में अयन शील (भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी) का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास से मिले डिजिटल डेटा से पता चला है कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में कई नौकरी चाहने वालों के नाम की सिफारिश की थी। इसके अलावा, नितई दत्त नामक व्यक्ति का नाम भी इस पूरी साजिश में सामने आ रहा है।
कोर्ट में कानूनी बहस
ईडी का पक्ष: जांच एजेंसी ने सुजीत बोस की 10 दिनों की हिरासत की मांग करते हुए कहा कि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। यदि उन्हें रिहा किया गया, तो वे गवाहों को डरा सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। एजेंसी ने तर्क दिया कि पूछताछ के दौरान वे सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों के सही जवाब देने से बच रहे हैं।
बचाव पक्ष का तर्क: सुजीत बोस के वकील ने जमानत की अर्जी देते हुए ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन दस्तावेजों के आधार पर गिरफ्तारी की गई है, वे 2022-23 के हैं, तो फिर 2026 में आकर यह गिरफ्तारी क्यों हुई? उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ईडी की चार्जशीट में उनके मुवक्किल का नाम शामिल नहीं था।
फिलहाल, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और मामले की गहराई से जांच जारी है। इस मामले ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।





