





पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केश्यारी ब्लॉक अंतर्गत एक इलाके में सरकारी ‘सबुज साथी’ योजना की साइकिलों को अवैध रूप से बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर शनिवार सुबह एक स्थानीय हाई स्कूल के सामने ग्रामीणों और अभिभावकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।



क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि छात्र-छात्राओं को मुफ्त में दी जाने वाली ये सरकारी साइकिलें उन्हें देने के बजाय स्थानीय साइकिल मिस्त्रियों को बेच दी गईं। शुक्रवार शाम को इलाके में यह खबर फैल गई कि कुछ मिस्त्री स्कूल प्रशासन से साइकिलें खरीद कर एक स्थानीय व्यक्ति के घर की छत पर छिपा रहे हैं। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उस घर का घेराव किया और पुलिस को इसकी सूचना दी।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और छिपाई गई साइकिलों को बरामद कर लिया। मामले की पूछताछ के लिए पुलिस ने दो स्थानीय साइकिल मिस्त्रियों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें बाद में कोर्ट में पेश किया गया। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार मिस्त्रियों ने बताया कि उन्होंने स्कूल के अधिकारियों को नकद पैसे देकर ये साइकिलें खरीदी थीं। इन साइकिलों को पार्ट्स में खोलकर बेचा जा रहा था, क्योंकि सरकारी साइकिलों को सीधे बेचना गैरकानूनी है।
स्कूल में तालाबंदी और भ्रष्टाचार के अन्य आरोप
शनिवार सुबह जब स्कूल खुला, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया, जिससे कई शिक्षक और शिक्षामित्र अंदर ही फंस गए। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया और फंसे हुए शिक्षकों को बाहर निकाला गया।
इस साइकिल घोटाले के उजागर होने के बाद, स्कूल प्रशासन पर भ्रष्टाचार के कई अन्य गंभीर आरोप भी लगने लगे हैं:
- अवैध वसूली: स्थानीय लोगों का दावा है कि स्कूल में एडमिशन के नाम पर बिना कोई रसीद दिए मनमाने पैसे (लगभग 2000 रुपये) लिए जाते हैं।
- कैंटीन टेंडर में रिश्वत: स्कूल कैंटीन का ठेका देने के नाम पर भी भारी रिश्वत (लगभग 18,000 रुपये) लेने की बात सामने आई है।
फिलहाल, जिन स्कूल अधिकारियों पर आरोप लगे हैं, वे स्कूल से अनुपस्थित हैं और फोन के माध्यम से भी उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस पूरी घटना के कारण इलाके में भारी तनाव का माहौल है। ग्रामीण अब इस पूरे भ्रष्टाचार मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच की मांग कर रहे हैं।





