






पश्चिम मेदिनीपुर: जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने सरकारी योजनाओं के कार्ड बनाने और सुधार के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के खुलेआम कैंप लगाकर लोगों से ठगी करने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को लैपटॉप और कंप्यूटर उपकरणों के साथ हिरासत में लिया है, जबकि उसका दूसरा साथी मौके से फरार हो गया।


माइक से प्रचार कर जुटाई थी भीड़

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने एक दिन पहले पूरे शहर में लाउडस्पीकर के जरिए प्रचार करवाया था कि कलेक्ट्रेट गेट के पास आयुष्मान भारत कार्ड, आधार कार्ड और वोटर कार्ड में सुधार व नए कार्ड बनाने का काम किया जा रहा है। सरकारी कार्यालय के सामने होने के कारण लोगों ने इसे अधिकृत केंद्र समझ लिया और सुबह से ही वहां लोगों की लंबी कतार लग गई।
काम के नाम पर 500 से 3000 रुपये तक की वसूली
कार्ड में नाम सुधारने या नए कार्ड के नाम पर लोगों से 500 रुपये, 750 रुपये, 1000 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक वसूले जा रहे थे। कतार में खड़े एक पीड़ित ने बताया कि उनके पिता के नाम में त्रुटि थी, जिसे ठीक करने के लिए उनसे 750 रुपये की मांग की गई थी। माइक से प्रचार और खुले मंच पर काम होते देख लोगों को किसी धोखाधड़ी का अंदेशा नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों के विरोध पर खुलासा, पुलिस ने किया डिटेन
जब कुछ स्थानीय लोगों को सरकारी अनुमति को लेकर संदेह हुआ, तो उन्होंने वहां बैठकर काम कर रहे युवकों से वैध कागजात और अनुमति पत्र दिखाने को कहा। कोई वैध दस्तावेज न दिखाए जाने पर लोगों का आक्रोश बढ़ गया और मौके पर हंगामा शुरू हो गया।
धक्का-मुक्की के दौरान एक आरोपी मौके से भागने में सफल रहा, जबकि भीड़ के दबाव में आरोपियों ने कुछ लोगों के पैसे भी वापस किए। सूचना मिलते ही कोतवाली थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए एक युवक को उसके लैपटॉप, प्रिंटर व अन्य उपकरणों समेत हिरासत में ले लिया।
प्राथमिक जांच में पकड़ा गया युवक पूर्व मेदिनीपुर का निवासी बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले में मामला दर्ज कर जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई संगठित गिरोह तो काम नहीं कर रहा था।







