कुछ मिले ताज या एजाज नहीं आएंगे/मेरे होठों पे तेरे राज़ नहीं आएंगे: डॉ. बलवंत सिंह

September 5, 2026 12:36 PM

✍️ जयराम गंभीर

आईआईटी खड़गपुर के नेताजी प्रेक्षागृह में  शिक्षक दिवस के के अवसर पर कवि सम्मेलन आयोजित हुई। जिसमें
राष्ट्रीय स्तर के कई चर्चित और स्वनामधन्य कवियों ने रचनाएं सुनाई।

डॉ बलवंत सिंह अपनी रंग बिरंगी एहसासों से सजी ग़ज़लों से उन्होंने भी समां बांध दी
वे कह रहे थे – कुछ मिले ताज या एजाज नहीं आएंगे/मेरे होठों पे तेरे राज़ नहीं आएंगे/जिनके चक्कर में हैं ये सारे दिल के मरीज़/ताकयामत वो दवासाज़ नहीं आएंगे/

और आगे वे कहते हैं
करते नहीं हैं मसअलों से वो समझौता/ पढ़ने वाले फुटपाथों पर पढ़ लेते हैं/
सर के बल चलते हैं घर की जरूरतों के लिए/ चलने देता नहीं जब पांव का छाला हमको।
इसके इतर वे फरमाए कि
रौशनी देके जो एहसान जताए मुझ पर/ऐसे सूरज से नहीं लेना उजाला हमको/
और
उससे किस मुंह से ज़मीनों की लड़ाई
लड़ते / बाद मां बाप के जिस भाई ने पाला हमको/
वे आगे कहते हैं
हम तो सुकरात हैं हम जहर से जिंदा होंगे / मारना है तो दो अमृत का प्याला हमको /
इसके आगे वे सुनाए
किसी का दिन किसी की शाम बनाई मैंने /अपनी ग़ज़लों से यही की है कमाई मैंने /
काम पे रख ले अपनी दिल की दुका पे अपनी/ पूरी कर ली है मुहब्बत की पढ़ाई मैंने /
जैसे बच्चा कोई खाता हो दवाएं कड़वी/ खाई वैसे ही तेरी शादी की मिठाई मैंने /

भोपाल से आई कवयित्री डॉ अनु सपन मंच  की प्रस्तुति अनगिन राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रही है उन्होंने
कहा
देखो कितने सितार बजते हैं /
दिल के सब तार तार बजते हैं /
जब से तुमने हमें निहारा है/
मुझमें घुंघरू हज़ार बजते हैं /
उन्होंने और आगे कहा
गम का श्रृंगार कर लिया हमने/
दिल को बीमार कर लिया हमने/
मौत आती है हमको आ जाए/
आपसे प्यार कर लिया हमने/

जीवन दर्शन को बयां करते हुए
वे कहतीं हैं
धूप के आईने में संवर जाएगी/जिंदगी जब तपेगी निखर जाएगी/

इतनी नफरत दिलों में न पाला करो/
हर खुशी वर्ना घुट घुट के मर जाएगी/

इस कदर शोहरतों पे न इतराइए /
धूप है दोपहर की उतर जाएगी /

मेरठ से तशरीफ लाए हुए मजाहिया शायर
पापुलर मेरठी  ने कहा कि

चंदू,जोज़फ,आरिफ और करतार पागल हो गए/ प्यार से जब उसने देखा चार पागल हो गए/ मैं भी उसके इश्क़ में पागल अभी होने को था/
मुझसे पहले मेरे बरखुरदार पागल
हो गए/
वे आगे फरमाए

नेक नीयत कभी थी न है न होगी/
मेरे काम में शराफत कभी थी न है न
होगी/मुझे नाज है कि मैं ज़ेब काटता
हूं /मुझे मांगने की आदत कभी थी न है न होगी/

वरिष्ठ कवि शिव ओम अंबर जी मंच पर अपने आशीर्वचनों से सारे युवा कवियों व छात्रों का
हौसला बढ़ाते हुए कहा कि –
अब हम बिखर रहे हैं घर को तुम संभालना/ मेरे बिखराव का अपना सलीका है/ ग़ज़ल कहता हूं मैं सजदे नहीं करता/इबादत का मेरा अपना तरीका है/

यूं ही समय के अभाव और सीमा के मद्देनज़र वे चंदेक लघु कविताएं ही सुना पाए, जिसमें अपनी बेटी के हवाले से उन्होंने कहा – मेरी बाहों में झूल जाती है / मुस्कराती है जब मेरी बच्ची रौशनी राह भूल जाती है/

फर्रुखाबाद से आए कवि उत्कर्ष अग्निहोत्री ने काव्य पाठ से  लोगों का मन मोहा.

नज़र भी चाहिए आँखों में सच को देख लेने की,
दियों की घटती-बढ़ती रोशनी से कुछ नहीं होता।

जो मेहनत करता है, ये वक़्त उसका साथ देता है,
कलाई में बँधी महँगी घड़ी से कुछ नहीं होता।

कार्यक्रम का सफल संचालन लखनऊ से आए कवि डॉ बलवंत सिंह ने किया।

कार्यक्रम के आयोजक डॉ राजीव रावत ने आगत अतिथि कवियों व सुधी श्रोताओं के प्रति अपनी भावपूर्ण आभार निवेदित किए। कवि सम्मेलन का कार्यक्रम
शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में राजभाषा विभाग, खड़गपुर प्रौद्योगिकी संस्थान और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की संयुक्त प्रयास की उपलब्धि रही।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories

Leave a Comment