






नई दिल्ली: बच्चों के स्वास्थ्य और बेहतर खान-पान को ध्यान में रखते हुए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रस्तावित नई नीति के तहत जल्द ही स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकती है। इसके साथ ही इस दायरे के भीतर किसी भी प्रकार के जंक फूड या अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों को प्रदर्शित करने की अनुमति भी नहीं होगी।


किन खाद्य पदार्थों पर लगेगा प्रतिबंध?

नई नीति के अनुसार, हाई फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों को इस दायरे से बाहर रखा जाएगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
कोल्ड ड्रिंक्स और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ
चिप्स, नमकीन और पैकेज्ड स्नैक्स
बर्गर, पिज्जा और नूडल्स
अत्यधिक तेल, चीनी और नमक युक्त अन्य प्रोसेस्ड फूड
इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को कम उम्र में ही अत्यधिक वसा, नमक और चीनी के सेवन की आदत से बचाना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है।
क्या तय किए गए हैं मानक?
खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावित मानकों के तहत अत्यधिक फैट, चीनी और नमक की सीमा तय की गई है:
फैट: प्रति 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में यदि 4.2 ग्राम से अधिक फैट है, तो उसे अत्यधिक फैट युक्त माना जाएगा।
चीनी: प्रति 100 ग्राम में 3 ग्राम से अधिक चीनी होने पर उसे हाई शुगर फूड की श्रेणी में रखा जाएगा।
नमक: प्रति 100 ग्राम सॉलिड फूड में 0.625 ग्राम से अधिक नमक होने पर उसे हाई सॉल्ट माना जाएगा।
कारोबारियों पर क्या पड़ेगा असर?
इस नए नियम के लागू होने से जहां एक तरफ बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है, वहीं स्कूलों के आसपास दुकान चलाने वाले स्थानीय व्यापारियों और खाद्य कंपनियों की चिंता बढ़ सकती है। बिक्री और विज्ञापनों पर रोक लगने से कई छोटे दुकानदारों की आय और मुनाफे पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इस प्रस्तावित नीति पर आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं, जिसके लिए 9 अक्टूबर तक का समय निर्धारित किया गया है।





