






वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता पैदा हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर सचेत करते हुए कहा है कि आने वाले कुछ महीनों में दुनिया को एक गंभीर खाद्य संकट (Food Crisis) का सामना करना पड़ सकता है। युद्ध के प्रभाव, उर्वरक (खाद) की किल्लत, खाद्यान्न आपूर्ति में रुकावटें और संभावित ‘सुपर अल नीनो’ का प्रभाव मिलकर वैश्विक खाद्य व्यवस्था पर भारी दबाव बना रहे हैं।


संकट के पीछे के मुख्य कारण:

वैश्विक संघर्ष और युद्ध का असर: मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के चलते दुनिया भर में अनाजों के उत्पादन और उनकी सामान्य आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।
उर्वरक की गंभीर कमी: रासायनिक खादों की आपूर्ति बाधित होने और उनकी कीमतों में उछाल के कारण कृषि क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित होने का अंदेशा बढ़ गया है।
सप्लाई चेन में रुकावट: व्यापारिक मार्गों पर बाधाओं के कारण कई जरूरतमंद देशों तक समय पर अनाज नहीं पहुंच पा रहा है।
‘सुपर अल नीनो’ का मौसमी खतरा: मौसम में आ रहे बदलाव और ‘सुपर अल नीनो’ की आशंका के कारण कई कृषि-प्रधान क्षेत्रों में सूखे या अप्रत्याशित मौसम का खतरा मंडरा रहा है, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
विदेश मंत्री की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा (Food Security) को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि समय रहते वैश्विक स्तर पर ठोस कदम और वैकल्पिक नीतियां नहीं बनाई गईं, तो कई देशों को खाद्यान्न की भारी कमी और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।






