




केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे पर एक बार फिर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “कान खोलकर सुन लें, यह देश कोई धर्मशाला नहीं है।” उन्होंने देशवासियों को आश्वासन दिया कि सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित किया जाएगा और घुसपैठियों को चुन-चुन कर बाहर निकाला जाएगा।


सीमा पर बाड़ लगाने का काम हुआ तेज:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारकेश्वर की एक जनसभा में पूर्ववर्ती राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि असुरक्षित सीमाओं पर तार की बाड़ लगाने के लिए जमीन हस्तांतरण का जो काम पिछले कई सालों से अटका हुआ था, वह नई राज्य सरकार के शपथ लेने के मात्र 12 दिनों के भीतर ही शुरू कर दिया गया है।
पेट्रापोल थाने का नया भवन राज्य पुलिस को सौंपा गया:
सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (LPAI) ने पेट्रापोल थाने का नवनिर्मित भवन आधिकारिक तौर पर राज्य पुलिस को सौंप दिया है। ज्ञात हो कि मई 2023 में ही इस भवन का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा किया गया था, लेकिन पूर्व सरकार के कार्यकाल में थाने को नए भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सका था। इस अवसर पर राज्य के खाद्य मंत्री ने भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि, “घुसपैठ 200% बंद होगी, एक भी घुसपैठिए को भारत में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपना काम करेगी।”
मालदा में घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम:
घुसपैठ के खिलाफ इन कड़े बयानों के दिन ही मालदा के सुखदेवपुर सीमा पर बीएसएफ (BSF) और स्थानीय ग्रामीणों की सतर्कता से घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया गया। भारत-बांग्लादेश सीमा के इस क्षेत्र में लगभग 1200 मीटर के हिस्से में कंटीले तार की बाड़ नहीं है। इसी का फायदा उठाते हुए 18 से 20 लोगों के एक दल ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की।
हालांकि, बीएसएफ के जवानों और स्थानीय निवासियों के कड़े विरोध के बाद घुसपैठियों को वापस पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से जल्द से जल्द इस खुले इलाके में तार की बाड़ लगाने की मांग की है। इस स्थिति को देखते हुए बीएसएफ ने सीमा पर अपनी गश्त दोगुनी कर दी है और स्थानीय पुलिस भी लगातार निगरानी रख रही है।






