






राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। कैबिनेट बैठक में पारित इस निर्णय के अनुसार, अब राज्य में नवनियुक्त शिक्षक प्रत्यक्ष राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।


नए नियमों के मुख्य बिंदु:

चुनाव लड़ने पर रोक: नए नियमों के तहत भविष्य में नियुक्त होने वाले शिक्षक पंचायत, नगरपालिका, विधानसभा या लोकसभा जैसे किसी भी चुनाव में प्रत्याशी के रूप में भाग नहीं ले सकेंगे।
मौजूदा शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित: इस बात को स्पष्ट किया गया है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं और जिनके पास राजनीतिक अधिकार हैं, उनके अधिकारों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। यह नियम केवल भविष्य की नई भर्तियों पर ही लागू होगा।
भर्ती प्रक्रिया में संशोधन: स्कूल सेवा आयोग की आगामी भर्ती प्रक्रियाओं और नियमों में इस शर्त को कैबिनेट के अनुमोदन के साथ शामिल किया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था की गरिमा लौटाने का प्रयास
इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों के माहौल को राजनीति से दूर रखना और शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना बताया गया है। बयान में कहा गया कि पिछले कई दशकों के शासनकालों में व्यवस्था पर लगे कथित (भ्रष्टाचार) और अन्य राजनीतिक विवादों के कारण शिक्षा के स्तर को नुकसान पहुँचा है। विद्यालयों को राजनीति से मुक्त कर एक आदर्श शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित करने के लिए यह पहल की गई है।







