





मालदा मोथाबाड़ी घटना: मोथाबाड़ी की घटना को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव (Chief Secretary), DGP, DM, और SP को कारण बताओ (Show-cause) नोटिस जारी किया गया है।



मालदा: चुनाव के माहौल के बीच बंगाल फिर से गरमा गया है। बुधवार को एसआईआर (SIR) की सूची में नाम न होने को लेकर विरोध शुरू हुआ। इसके बाद मालदा के कालियाचक स्थित मोथाबाड़ी ने रणक्षेत्र का रूप ले लिया। गाड़ियों में आग लगा दी गई और भारी तोड़फोड़ की गई।

बुधवार सुबह से रात तक 3 महिलाओं समेत 7 न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को बंधक बनाकर रखा गया। आधी रात को केंद्रीय बलों ने उन्हें बचाया। इसके बाद भी प्रदर्शनकारियों ने उनका पीछा किया… कुल मिलाकर मोथाबाड़ी में बेहद भयानक स्थिति पैदा हो गई।
बुधवार को मालदा के कालियाचक के मोथाबाड़ी में हुई इस घटना के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, ”यह न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने का एक निर्लज्ज प्रयास है, बल्कि यह अदालत के अधिकार को चुनौती देने का भी विषय है। यह लंबित मामलों की न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने का एक सुनियोजित और जानबूझकर किया गया प्रयास है।”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जयमाल्या बागची ने कहा, ”न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा आयोग की जिम्मेदारी है। इसके लिए जो भी करने की जरूरत है, वह आयोग को ही करना होगा।”
मोथाबाड़ी कांड में सुप्रीम कोर्ट के क्या-क्या निर्देश हैं?
१. बुधवार रात की घटना की जांच CBI या NIA से कराई जाएगी। जांच कौन करेगा, अर्थात NIA या CBI, यह चुनाव आयोग तय करेगा।
२. जांच एजेंसी को जांच के बाद जो कुछ भी मिलेगा, उस जांच की रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी।
३. इस घटना के परिणामस्वरूप, राज्य के मुख्य सचिव, DGP, DM, SP को कारण बताओ (Show-cause) नोटिस दिया गया है। साथ ही यह घटना क्यों घटी, इसका सही स्पष्टीकरण देना होगा।
४. इसके अलावा आगामी ६ अप्रैल को इस मामले की वर्चुअल सुनवाई होगी। इसमें सभी को उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया गया है।
५. SIR को लेकर राज्य भर में लगभग ७०० न्यायिक अधिकारी काम कर रहे हैं, उन सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग और राज्य पुलिस प्रशासन लेगा, आवश्यकता पड़ने पर और अधिक केंद्रीय बलों को तैनात करना होगा।
६. जहाँ SIR का काम होगा, वहाँ ५ से अधिक लोग उपस्थित नहीं रह सकेंगे, यह सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है।
७. जिस जगह पर न्यायिक अधिकारी काम करेंगे, उन्हें केंद्रीय बलों द्वारा सुरक्षा प्रदान करनी होगी।
८. इसके साथ ही अधिकारी जहाँ ठहरेंगे और उनके आवागमन के दौरान केंद्रीय बलों द्वारा सुरक्षा दी जानी चाहिए।
९. यदि न्यायिक अधिकारियों के परिवार को लगता है कि वे असुरक्षित हैं, तो इस स्थिति में मामले की जांच कर परिवार को भी सुरक्षा प्रदान करनी होगी।






