





खड़गपुर मंडल के पांशकुड़ा रेलवे स्टेशन पर जीआरपी (रेलवे पुलिस) ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। स्टेशन परिसर में नियमित गश्त और सघन चेकिंग के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में गांजा जब्त किया है, जिसे तस्कर स्टेशन पर ही छोड़कर फरार हो गए थे।



संदिग्ध बैगों ने खोला राज:-

घटना के समय रेलवे पुलिस के जवान प्लेटफॉर्म और स्टेशन परिसर की सुरक्षा का जायजा ले रहे थे। इसी दौरान उन्हें दो लावारिस ट्रॉली बैग दिखाई दिए। काफी समय तक जब किसी ने उन बैगों पर अपना दावा नहीं किया, तो सुरक्षाकर्मियों को संदेह हुआ। पुलिस ने सावधानी बरतते हुए जब उन बैगों को खोला, तो वे दंग रह गए।
दोनों ट्रॉली बैगों के अंदर कुल 29 पैकेट करीने से पैक किए गए थे। जब इन पैकेटों की जांच की गई, तो उनमें उच्च गुणवत्ता वाला गांजा भरा पाया गया। पुलिस के अनुसार, बरामद किए गए गांजे का कुल वजन 31 किलो 38 ग्राम मापा गया है।
तस्करों की तलाश में जुटी पुलिस:-
शुरुआती जांच से ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस की मुस्तैदी और चेकिंग अभियान को देखकर तस्कर घबरा गए और पकड़े जाने के डर से माल वहीं छोड़कर भाग निकले। इस बरामदगी के बाद जीआरपी ने अज्ञात तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
CCTV फुटेज खंगाल रही है टीम:-
पुलिस अब पांशकुड़ा स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस का लक्ष्य उन संदिग्धों की पहचान करना है जो इन बैगों को लेकर स्टेशन पहुंचे थे। अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल इस पूरे सिंडिकेट का पता लगाने के लिए छानबीन तेज कर दी गई है। यह कार्रवाई क्षेत्र में सक्रिय ड्रग तस्करों के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
हत्या के मामले में एक व्यक्ति को दोषी करार
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित काँथी (Kanthi) की एक अदालत ने 15 साल पहले हुई एक हत्या के मामले में एक व्यक्ति को दोषी करार दिया है। यह मामला जमीन विवाद से शुरू हुए झगड़े का है, जिसने अंततः एक बुजुर्ग की जान ले ली थी।
क्या है पूरा मामला?
घटना सितंबर 2010 की है, जो काँथी 3 ब्लॉक के धान्दालीबाड़ गाँव में घटी थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कनाई बारिक (उर्फ कानू) और उसके पड़ोसी तापस राय के बीच लंबे समय से घर की सीमा वाली जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।
विवाद के दिन, कनाई बारिक ने लोहे के सब्बल (Crowbar) से तापस पर हमला करने की कोशिश की। अपने बेटे को बचाने के लिए तापस के पिता, 55 वर्षीय सुरेश राय बीच में आ गए। हमले में सुरेश राय और तापस दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
इलाज के दौरान हुई थी मौत:-
घायलों को पहले स्थानीय काँथी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें कोलकाता के पीजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। 13 सितंबर 2010 को इलाज के दौरान सुरेश राय ने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने कनाई के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया।
9 साल तक फरार रहा आरोपी:-
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी कनाई बारिक मौके से फरार हो गया था। पुलिस के मुताबिक, वह करीब 9 साल तक कानून की गिरफ्त से बाहर रहा। आखिरकार, पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और तब से वह न्यायिक हिरासत में था।
अदालत का फैसला:-
सोमवार को काँथी अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक सेकंड कोर्ट) नूरुज्जमां अली ने इस मामले में सुनवाई पूरी की। सरकारी वकील इकबाल हुसैन ने बताया कि कुल 10 गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर अदालत ने कनाई बारिक को दोषी पाया है। अदालत मंगलवार को सजा की अवधि की घोषणा करेगी।









