





भीषण गर्मी और उमस के बाद शुक्रवार दोपहर को हुई बारिश ने शहरवासियों को गर्मी से राहत तो दी, लेकिन कुछ ही घंटों की बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। बारिश शुरू होते ही शहर के कई प्रमुख इलाके और सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं।



मुख्य अस्पताल जाने वाले मार्ग पर भारी जलजमाव देखने को मिला, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि स्थानीय नगर पालिका कार्यालय के सामने भी पानी जमा हो गया, जिससे लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। शहर के कई निचले क्षेत्रों में सड़कें पानी से लबालब भर गईं। पैदल चलने वाले लोगों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी जलभराव के बीच से गुजरने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हर साल बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का कहना है कि महज 10 से 15 मिनट की तेज बारिश में ही प्रमुख रास्ते तालाब में तब्दील हो जाते हैं। नालों की नियमित सफाई न होने और आधुनिक जल निकासी प्रणाली के अभाव के कारण यह समस्या वर्षों से लगातार बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रशासन द्वारा इस जल जमाव की समस्या का कोई प्रभावी समाधान नहीं किया गया है। अब लोगों की निगाहें नए प्रशासन पर टिकी हैं। शहरवासियों की मांग है कि वर्षों पुरानी इस बुनियादी समस्या के समाधान के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस और स्थायी कदम उठाया जाए।
फिलहाल, इस बारिश ने चिलचिलाती गर्मी से फौरी राहत तो जरूर दी है, लेकिन सड़कों पर भरे पानी ने एक बार फिर नागरिक सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।







