





पश्चिम बंगाल में राजनीतिक पारा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सोमवार को कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस घटना के दौरान दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थरबाजी और नारेबाजी हुई, जिससे पूरे मेटलाइफ हाउस क्षेत्र में तनाव फैल गया।



कैसे शुरू हुआ विवाद?

जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब खड़गपुर से भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य की चुनाव आयोग को form-6 सौंपने पहुंचा था। उसी समय, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का एक जुलूस भी वहां से गुजर रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों पक्षों के आमने-सामने आते ही नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और दोनों तरफ से ईंट-पत्थर चलने लगे। इस संघर्ष में कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं और सड़क किनारे खड़ी कुछ गाड़ियों के शीशे भी टूट गए।
पुलिस की कार्रवाई:-
स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस बल ने शुरुआत में प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन मामला बढ़ता देख लालबाजार से अतिरिक्त पुलिस बल और कॉम्बैट फोर्स को बुलाया गया। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी:-
इस घटना के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है:
•भाजपा का पक्ष: भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं पर जानबूझकर हमला किया गया है ताकि वे चुनाव आयोग के सामने अपनी बात न रख सकें। उन्होंने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया।
•TMC का पक्ष: वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले उकसावे वाली नारेबाजी की, जिसके कारण यह अप्रिय घटना घटी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम:-
CEO कार्यालय के आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि हिंसा भड़काने वालों की पहचान की जा सके। इस मामले में अब तक कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है। प्रशासन ने अपील की है कि सभी दल शांति बनाए रखें।








