




कोलकाता: पश्चिम बंगाल को अक्सर ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहाँ पहाड़, समुद्र, नदी और जंगल—सब कुछ मौजूद है। इसके साथ ही हजारों ऐतिहासिक मंदिर राज्य की गौरवशाली गाथा सुनाते हैं। राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, अब बंगाल के पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक विशेष मास्टर प्लान तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के पहले बजट में पर्यटन और संस्कृति के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। दार्जिलिंग से लेकर सुंदरबन और पुरुलिया से लेकर बीरभूम तक, राज्य के हर कोने को सजाने की तैयारी है।


दुर्गा पूजा और पर्यटन का विशेष ब्रांडिंग अभियान

पर्यटन और त्योहारों का अनूठा मेल इस नए बजट की सबसे बड़ी खासियत है। वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता के अनुसार, “दुर्गा पूजा बंगाल की सांस्कृतिक आत्मा है और यह एक विश्वव्यापी उत्सव है।” दुर्गा पूजा को केंद्र में रखकर एक लक्ष्य-आधारित पर्यटन ब्रांडिंग अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, एक सर्वांगीण योजना के तहत हेरिटेज कमेटी के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: ‘शक्तिपीठ’ और ‘तीर्थयात्रा’ सर्किट
धार्मिक पर्यटन को सहज और आकर्षक बनाने के लिए राज्य में ‘बंगाल शक्तिपीठ सर्किट’ बनाया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से बीरभूम के प्रसिद्ध मंदिर शामिल हैं। बजट के अनुसार भ्रामरी देवी, नंदीकेश्वरी, तारापीठ, बक्रेश्वर, फुल्लरा और कंकालीतला जैसे मंदिरों को नया रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही, भक्ति आंदोलन की भूमि नवद्वीप में श्री चैतन्य महाप्रभु को समर्पित ‘चैतन्य महाप्रभु तीर्थयात्रा सर्किट’ भी तैयार किया जाएगा।
इको-टूरिज्म, टाइगर सफारी और हेरिटेज हब
दार्जिलिंग में एक विशेष ‘हेरिटेज टूरिज्म हब’ बनेगा, जहाँ ब्रिटिश काल के चाय बंगलों को हेरिटेज का दर्जा दिया जाएगा। डुआर्स और सुंदरबन को नए सिरे से सजाने के लिए टूरिज्म मास्टर प्लान लागू किया जाएगा। लाल मिट्टी के जिले पुरुलिया के लिए ‘इंटीग्रेटेड टूरिज्म’ और झारग्राम में ‘टाइगर सफारी’ शुरू करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाने के साथ-साथ तारकेश्वर, वारुणी और रास मेले को भी पर्यटन के नक़्शे से जोड़ा जाएगा।
संस्कृति और इतिहास का संरक्षण
बजट में बंगाल की समृद्ध संस्कृति के संरक्षण पर भी खासा ध्यान दिया गया है। ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा। रवींद्रनाथ टैगोर की संस्कृति के प्रसार के लिए ‘टैगोर कल्चरल सेंटर’ बनेगा। इसके अलावा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक आवास का जीर्णोद्धार किया जाएगा और जीराट में उनकी 125 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
पर्यटन और संस्कृति के इस बेहतरीन तालमेल के साथ, नई सरकार का यह पहला बजट ‘नए बंगाल’ के निर्माण का एक स्पष्ट संदेश देता है।







