​’आज ही वापस आएं, मैं एक घंटे में इस्तीफा दे दूंगा’: बागियों को अभिषेक बनर्जी की खुली चुनौती

July 18, 2026 11:10 PM

तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक राजनीतिक संकट, विभाजन और दलबदल के लिए बागी नेताओं ने बार-बार अभिषेक बनर्जी पर उंगली उठाई है। अब अभिषेक ने इन आरोपों को पूरी तरह से ‘झूठा बहाना’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर बागी नेताओं ने केवल उनके कारण ममता बनर्जी की पार्टी से दूरी बनाकर ऋतब्रत गुट या एनसीपीआई (NCPI) में शामिल होने का फैसला किया है, तो वे तुरंत पार्टी में वापस आ जाएं, वे (अभिषेक) एक घंटे में इस्तीफा देने को तैयार हैं।

​शनिवार को दलबदलुओं को सीधे चुनौती देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, “जनता मूर्ख नहीं है। जरूरत पड़े तो आज ही आएं। आप लोग वापस आएं, मैं एक घंटे के भीतर इस्तीफा दे दूंगा।” इसके साथ ही उन्होंने जोर देते हुए कहा, “कोई वापस नहीं आएगा। डील हो रही है कि उधर जाओ। अभिषेक बनर्जी को गाली दो… तुम्हें बचा कर रखेंगे। न ईडी पकड़ेगी, और न ही सीबीआई। जिनके खिलाफ आरोप हैं, वे अब या तो पुलिस की गिरफ्त में हैं, या फिर ऋतब्रत के साथ हैं।” अभिषेक के अनुसार, बागियों की असली समस्या वे नहीं हैं, बल्कि ईडी और सीबीआई के डर से वे पाला बदल रहे हैं।

​गौरतलब है कि 4 मई 2026 को विधानसभा चुनाव के नतीजों में बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल मची है। इसके बाद से ही विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधियों और कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे बड़े नेताओं ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक के बाद काकली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय जैसे करीब 20 सांसद एनसीपीआई में शामिल हो गए।

​दूसरी ओर, उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और एंटाली के विधायक संदीपन साहा ने खुद को ‘असली तृणमूल’ होने का दावा करते हुए ‘नव तृणमूल ब्लॉक’ का गठन किया। बाद में एक-एक करके ममता बनर्जी के भरोसेमंद लगभग सभी नेता बड़ी संख्या में जाकर ऋतब्रत के गुट में शामिल हो गए। इनमें से लगभग सभी का एकमात्र आरोप अभिषेक बनर्जी के खिलाफ है। उन सभी ने अभिषेक के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए इसे ही पार्टी छोड़ने और ऋतब्रत का साथी बनने का मुख्य कारण बताया है।

​हालांकि, अभिषेक की इस टिप्पणी से पहले ही पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इन बागियों के पार्टी छोड़ने का ‘असली कारण’ स्पष्ट किया था। अभिषेक के खिलाफ दलबदलुओं के सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया था कि यह सब उनका महज एक बहाना है। अपनी नेता के इस संदेश के तीन दिन बाद अब अभिषेक ने भी उसी ‘बागियों के बहाने’ वाले सिद्धांत को उठाया है। अब तक अभिषेक बनर्जी एकतरफा रूप से बागियों के हमले का निशाना बन रहे थे। लेकिन शनिवार शाम अपने इस्तीफे की शर्त पर, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने अब बागियों को यह सीधी चुनौती देकर पलटवार किया है।

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