दीघा: मछुआरों ने की समुद्री मछली पकड़ने पर ‘बैन पीरियड’ बढ़ाने की मांग, 60 के बजाय 90 दिन का प्रस्ताव

April 20, 2026 10:25 AM

पश्चिम बंगाल के दीघा और तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने पर वार्षिक प्रतिबंध (Ban Period) शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार स्थानीय मछुआरों ने इस अवधि को बढ़ाने की मांग की है। मछुआरों का मानना है कि समुद्र में मछलियों के बेहतर प्रजनन और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए वर्तमान 60 दिनों की अवधि पर्याप्त नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

हर साल समुद्री संसाधनों के संरक्षण और मछलियों के प्रजनन (Breeding) के लिए सरकार द्वारा समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगाई जाती है। इस वर्ष यह प्रतिबंध 14 अप्रैल से शुरू हुआ है और 15 जून तक जारी रहेगा। कुल 60 दिनों के इस अंतराल के बाद मछुआरे फिर से समुद्र में जा सकेंगे।

हालांकि, मछुआरा संगठनों का तर्क है कि जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र के कारण मछलियों के अंडे देने का समय भी बदल गया है। 60 दिनों के भीतर मछलियों की संख्या में वह वृद्धि नहीं हो पाती, जिसकी उम्मीद की जाती है। नतीजतन, प्रतिबंध हटने के कुछ ही दिनों बाद फिर से मछलियों का संकट खड़ा हो जाता है।

मछुआरा संगठनों की प्रमुख मांगें:

1.अवधि में विस्तार: मछुआरों ने मांग की है कि प्रतिबंध की अवधि को 60 दिनों से बढ़ाकर 90 दिन (3 महीने) किया जाए। दक्षिण बंगाल मछुआरा फोरम के अनुसार, सर्वे से पता चला है कि यदि यह समय बढ़ाया जाता है, तो मछलियों की आबादी में उल्लेखनीय सुधार होगा।

2.छोटे मछुआरों को छूट: फोरम की मांग है कि प्रतिबंध के दौरान बड़े जहाजों और ट्रॉलरों पर पूर्ण रोक रहे, लेकिन पारंपरिक छोटे मछुआरों को आजीविका के लिए सीमित अनुमति दी जानी चाहिए।

3.पड़ोसी राज्यों जैसी नीति: मछुआरों का आरोप है कि ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में छोटे मछुआरों को कुछ रियायतें दी जाती हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में नियम बहुत सख्त हैं।

4.’समुद्र साथी’ योजना का लाभ: मछुआरों ने शिकायत की है कि दो साल पहले घोषित ‘समुद्र साथी’ योजना (जिसका उद्देश्य प्रतिबंध के दौरान आर्थिक सहायता देना था) का लाभ अभी तक कई लाभार्थियों को नहीं मिला है।

प्रशासन का रुख:

मत्स्य विभाग के अधिकारियों (कांथी संभाग) के अनुसार, वर्तमान में प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, तटीय पुलिस और प्रशासन को कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी ट्रॉलर इस दौरान समुद्र में न उतरे। प्रशासन द्वारा मछुआरों के बीच जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।

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