





पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान संपन्न होने के साथ ही कयासों का बाजार गर्म हो गया है। हाल ही में ‘प्रजा पोल’ (Praja Poll) द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल के रुझानों ने राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। इन आंकड़ों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।



टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर:

एग्जिट पोल के रुझानों के अनुसार, बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। ‘प्रजा पोल’ के विश्लेषण के मुताबिक, किसी भी दल के लिए सत्ता की राह बहुत आसान नहीं दिख रही है।
संभावित सीट अनुमान:
•तृणमूल कांग्रेस (TMC): 142 – 152 सीटें
•भारतीय जनता पार्टी (BJP): 125 – 135 सीटें
•वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन: 5 – 10 सीटें
•अन्य: 1 – 3 सीटें
पश्चिम बंगाल में बहुमत का जादुई आंकड़ा 148 है। एग्जिट पोल के ये आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि टीएमसी बहुमत के बेहद करीब रह सकती है, वहीं बीजेपी भी पिछले चुनाव के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत करती दिख रही है।
वोट शेयर का समीकरण:
सर्वेक्षण के अनुसार, टीएमसी को लगभग 43% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि बीजेपी 40% वोट शेयर के साथ मजबूती से पीछे खड़ी है। वामपंथी दलों और कांग्रेस के लिए यह चुनाव भी अस्तित्व बचाने की लड़ाई जैसा दिख रहा है, क्योंकि उनका वोट शेयर लगातार घटता नजर आ रहा है।
क्या ‘साइलेंट वोटर’ बदलेंगे खेल?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में ‘साइलेंट वोटर’ हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। 2021 के चुनावों में भी कई एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे जब टीएमसी ने भारी बहुमत हासिल किया था। इस बार भी महिलाओं के वोट और ग्रामीण क्षेत्रों के रुझान अंतिम नतीजों में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।
मुख्य मुद्दे जिन्होंने प्रभावित किया मतदान:
इस चुनाव में भ्रष्टाचार, संदेशखली कांड, विकास कार्य और विभिन्न लक्ष्मी भंडार जैसी जन कल्याणकारी योजनाएं मुख्य मुद्दे रहे। जहां टीएमसी ने अपनी योजनाओं के दम पर वापसी की उम्मीद जताई है, वहीं बीजेपी ने भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को आधार बनाकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है।






