‘सिल्टेशन’ पद्धति से बन रहा है चर, ग्रामीणों ने की स्थायी तटबंध निर्माण की मांग
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में नदियों के किनारे ‘सिल्टेशन’ यानी गाद जमा होने की प्राकृतिक प्रक्रिया से नए ‘चर’ (रेतीले द्वीप या भूमि) का निर्माण हो रहा है। हालांकि यह भौगोलिक दृष्टि से एक नई भूमि का संकेत है, लेकिन स्थानीय निवासियों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है। प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से इस स्थान पर तत्काल और स्थायी सुरक्षा दीवार या तटबंध (Embankment) बनाने की मांग की है।
क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नदी के बहाव के साथ आने वाली मिट्टी और गाद के जमा होने से नदी के किनारे नई जमीन तैयार हो रही है। वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘सिल्टेशन’ कहा जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उचित योजना और सुरक्षा के बिना यह प्रक्रिया मानसून के दौरान खतरनाक साबित हो सकती है। बिना मजबूत तटबंध के, नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह नई भूमि धंस सकती है और आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा कर सकती है।
ग्रामीणों की मांग:
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल बाढ़ और कटाव के कारण वे अपनी जमीन और घर खो देते हैं। अब जब प्राकृतिक रूप से चर बन रहा है, तो सरकार को इसे संरक्षित करने और गांवों को बचाने के लिए कंक्रीट के मजबूत तटबंध बनाने चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग को इस स्थिति से अवगत करा दिया गया है। स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी क्षेत्र का निरीक्षण कर सकते हैं ताकि मिट्टी के कटाव को रोकने और स्थायी समाधान निकालने के लिए रूपरेखा तैयार की जा सके।
फिलहाल, मिदनापुर के इन इलाकों में रहने वाले लोग डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से लेगा और जल्द ही सुरक्षात्मक निर्माण कार्य शुरू होगा।