अभिषेक बनर्जी की सभा में पत्रकारों के लिए ‘QR कोड’ अनिवार्य, सुरक्षा के कड़े इंतजामों पर भड़के पत्रकार
मेदिनीपुर के कॉलेजिएट स्कूल मैदान में तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की जनसभा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आमतौर पर राजनीतिक रैलियों में प्रेस कार्ड या सरकारी ‘डीआईबी’ (DIB) पास प्रवेश के लिए पर्याप्त होते हैं, लेकिन इस बार पत्रकारों के लिए ‘QR कोड स्कैन’ और ‘ऑन-स्पॉट पंजीकरण’ की नई व्यवस्था लागू की गई, जिससे मीडियाकर्मियों में भारी नाराजगी देखी गई।
सुरक्षा के नाम पर नई पाबंदियां:
सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से सभा स्थल के प्रवेश द्वार पर एक विशेष बूथ बनाया गया था। यहां पत्रकारों को अपना नाम, संस्थान का नाम और फोन नंबर दर्ज कराने के बाद एक क्यूआर कोड स्कैन करना अनिवार्य था। प्रशासन का तर्क है कि यह प्रक्रिया सुरक्षा कारणों और आगंतुकों के डिजिटल रिकॉर्ड रखने के लिए अपनाई गई है।
पत्रकारों का विरोध और असंतोष:
सभा स्थल पर मौजूद पत्रकारों ने इस कदम को अनावश्यक बताया। उनका कहना था कि जब उनके पास पहले से ही आधिकारिक जिला पास और कार्यालय के पहचान पत्र मौजूद हैं, तो इस तरह की जटिल प्रक्रिया समय की बर्बादी है।
देरी का मुद्दा: पंजीकरण प्रक्रिया के कारण कई पत्रकारों को काफी देर तक धूप में कतारों में खड़ा रहना पड़ा।
गोपनीयता और बाधा: मीडियाकर्मियों का मानना है कि इस तरह की कड़ी सुरक्षा जांच प्रेस की स्वतंत्रता में एक तरह की बाधा है।
प्रशासन का रुख:
सूचना विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें ऊपर से सख्त निर्देश मिले थे कि बिना डिजिटल पंजीकरण के किसी को भी प्रेस गैलरी में प्रवेश न दिया जाए। हालाँकि सुरक्षा के ये कड़े घेरे अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, लेकिन इसकी वजह से दिनभर पत्रकारों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस का माहौल बना रहा।
अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने सुरक्षा घेरे को इतना मजबूत कर दिया था कि सभा स्थल के भीतर भी पत्रकारों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही थी। यह मामला अब पत्रकार संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।