चुनावी मैदान में दिखी राजनीतिक सौजन्य की तस्वीर, बीजेपी उम्मीदवार ने छुए सीपीएम नेता सूर्यकांत मिश्रा के पैर

March 23, 2026 10:51 AM

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अक्सर तीखी बयानबाजी और संघर्ष की खबरें सामने आती हैं, लेकिन रविवार को पश्चिम मेदिनीपुर के नारायणगढ़ इलाके से एक दुर्लभ और सुखद तस्वीर सामने आई। यहाँ चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी और सीपीएम के नेता आमने-सामने आ गए, जहाँ प्रतिद्वंद्विता के बजाय राजनीतिक शिष्टाचार (सौजन्य) का नजारा देखने को मिला।

क्या है पूरा मामला?

रविवार को सीपीएम के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सूर्यकांत मिश्रा नारायणगढ़ में पार्टी उम्मीदवार तापस सिन्हा के समर्थन में एक प्रचार रैली कर रहे थे। उसी समय, बीजेपी के उम्मीदवार रमाप्रसाद गिरी भी अपने समर्थकों के साथ उसी क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे।

जैसे ही दोनों रैलियां एक-दूसरे के करीब पहुंचीं, बीजेपी उम्मीदवार रमाप्रसाद गिरी ने अपनी पदयात्रा रोकी और सीधे सूर्यकांत मिश्रा के पास पहुंच गए। उन्होंने न केवल दिग्गज वामपंथी नेता से हाथ मिलाया, बल्कि उनका हाथ अपने सिर पर रखकर आशीर्वाद भी मांगा। सूर्यकांत मिश्रा ने भी मुस्कुराते हुए उनके प्रति शिष्टाचार दिखाया और आगे बढ़ गए।

बीजेपी और सीपीएम की प्रतिक्रिया:-

इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी उम्मीदवार रमाप्रसाद गिरी ने कहा, “सूर्यकांत मिश्रा एक बहुत वरिष्ठ नेता हैं और मैं उम्र में उनसे काफी छोटा हूं। उन्हें रास्ते में देखकर मैंने केवल एक कनिष्ठ होने के नाते उनका आशीर्वाद लिया। यह बंगाल की संस्कृति और सामान्य शिष्टाचार है, इसमें कोई राजनीति नहीं देखनी चाहिए।”

वहीं, सीपीएम उम्मीदवार तापस सिन्हा ने इसे सामान्य घटना बताते हुए कहा कि वामपंथियों के जुलूस को देखकर लोग अक्सर सम्मान व्यक्त करते हैं। सूर्यकांत मिश्रा जी एक सम्मानित व्यक्तित्व हैं, इसलिए विरोधी दल के उम्मीदवार का उनसे आशीर्वाद लेना कोई बड़ी बात नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस का तंज:-

हालांकि, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस घटना पर चुटकी लेने से परहेज नहीं किया। टीएमसी उम्मीदवार प्रतिभारानी मैती ने कहा, “बड़ों का आशीर्वाद लेना अच्छी बात है, लेकिन चुनाव के समय सार्वजनिक रूप से ऐसा करना ‘राम और वाम’ (बीजेपी और सीपीएम) के बीच किसी गुप्त साठगांठ का संकेत भी दे सकता है।”

गौरतलब है कि नारायणगढ़ सूर्यकांत मिश्रा का पुराना गढ़ रहा है, जहाँ से वे पांच बार विधायक रह चुके हैं। चुनावी सरगर्मी के बीच इस घटना ने स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है और सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हो रही है।

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