





पश्चिम बंगाल में पंचायत और आगामी चुनावों के मद्देनजर जंगलमहल का सियासी पारा गरमाया हुआ है। पुरुलिया के झलदा और आसपास के इलाकों में कुर्मी समुदाय का विरोध प्रदर्शन तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कुर्मी समुदाय को लेकर एक बड़ा बयान दिया है और पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश जारी किए हैं।



kgp news की रिपोर्ट के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने कुर्मी समुदाय के गुस्से और उनकी मांगों का रुख सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर मोड़ने की रणनीति तैयार की है।

अभिषेक बनर्जी के संबोधन की मुख्य बातें:
- बीजेपी पर हमला: अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया कि कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने का अधिकार केंद्र सरकार (बीजेपी) के पास है, राज्य सरकार के पास नहीं। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं ने अतीत में कुर्मी समुदाय का अपमान किया है, लेकिन कभी माफी नहीं मांगी, जबकि टीएमसी हमेशा उनके सम्मान के लिए खड़ी रही है।
- स्थानीय नेताओं को सख्त निर्देश: अभिषेक बनर्जी ने पुरुलिया और झलदा क्षेत्र के स्थानीय टीएमसी नेताओं—विशेषकर कुर्मी पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं—को निर्देश दिया है कि वे समुदाय के बीच जाएं और उन्हें समझाएं कि उनकी मांगों को पूरा न करने के पीछे असल में केंद्र सरकार की विफलता है।
- संगठन की मजबूती पर जोर: kgp news को मिली जानकारी के अनुसार, बंदवान और झलदा के पास हुई एक आंतरिक बैठक में अभिषेक ने स्थानीय गुटबाजी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करें, अन्यथा पार्टी सख्त कदम उठाएगी। उन्होंने सवाल किया कि “क्या राज्य में ऐसा कोई ब्लॉक है जहां टीएमसी अपना झंडा नहीं लगा सकती?”
क्या है कुर्मी समुदाय की मांग?
जंगलमहल (पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम) का कुर्मी समुदाय लंबे समय से खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने और अपनी भाषा (कुड़मालि) को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता देने की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर हाल ही में इस क्षेत्र में कई बड़े रेल रोको और सड़क रोको आंदोलन हुए हैं।
अभिषेक बनर्जी का यह दांव कुर्मी समुदाय की नाराजगी को कम करने और इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है।





