





’लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ रची जा रही है साजिश’



पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक बार फिर पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। मंगलवार को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य की मतदाता सूची में 30 हजार बाहरी लोगों के नाम अवैध रूप से शामिल कर लिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सीधे तौर पर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है।

बाहरी राज्यों से ट्रेन भर-भर कर लाए जा रहे हैं लोग
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री ने लिखा कि बीजेपी बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों से लोगों को ट्रेनों के जरिए बंगाल ला रही है। उनका मकसद बंगाल के असली मतदाताओं को किनारे कर चुनाव जीतना है। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि बंगाल की जनता इस ‘गंदे खेल’ का करारा जवाब देगी।
चुनाव आयोग को लिखे पत्र में मुख्य आरोप:
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में तीन गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने लिखा है:
संविधानिक संस्था पर सवाल: ऐसा प्रतीत हो रहा है कि चुनाव आयोग बंगाल के लोगों के मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहा है। एक संवैधानिक संस्था द्वारा इस तरह का व्यवहार गहरी चिंता का विषय है।
जाली फॉर्म-6 जमा करना: मुख्यमंत्री का आरोप है कि बीजेपी के एजेंटों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में भारी संख्या में जाली ‘फॉर्म-6’ जमा किए हैं ताकि उन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जा सकें जो पश्चिम बंगाल के निवासी ही नहीं हैं।
बंद दरवाजों के पीछे काम: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बंद दरवाजों के पीछे संदिग्ध और जाली आवेदनों को जल्दबाजी में स्वीकार कर रहा है। यह पूरी तरह से गैरकानूनी है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव पर सीधा हमला है।
उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने यही रणनीति महाराष्ट्र और दिल्ली में भी अपनाई थी और वहां सफल रही, लेकिन बंगाल में उनके मंसूबे कामयाब नहीं होंगे।
कानूनी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के मेमो पर आपत्ति
पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला दिया गया है। 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में लगभग 60 लाख नामों के आगे ‘विचाराधीन’ (Under Trial) लिखा हुआ था। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब इन आवेदनों पर न्यायाधीशों द्वारा विचार किया जा रहा था, ठीक उसी समय मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म-6 के माध्यम से 30 हजार नए आवेदन स्वीकार कर लिए। यह सब संबंधित बूथों या राजनीतिक दलों को बिना सूचित किए किया गया।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने 27 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए उस मेमो को ‘पूरी तरह से अवैध’ बताया है, जिसमें चुनाव में नामांकन जमा करने के अंतिम दिन तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने और पता बदलने (फॉर्म 6 और 8 के जरिए) की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों को इस तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वैध मतदाताओं के साथ खड़ी हैं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वे जमीनी हकीकत की जांच करें, हस्तक्षेप करें और सुनिश्चित करें कि अंतिम वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद किसी भी जाली वोटर को सूची में न जोड़ा जाए। चंद्रकोणा, गरबेता और बिष्णुपुर में अपनी चुनावी रैलियों के दौरान भी मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और जनता को आश्वस्त किया, “जब तक मैं जीवित हूं, किसी भी वैध मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से कटने नहीं दूंगी।”






