कालियाचक में सनसनी! मोफक्केरुल इस्लाम को मिली जमानत, उठ रहे हैं बड़े सवाल

April 16, 2026 11:15 PM

मालदा के कालियाचक और मोथाबाड़ी कांड के मुख्य आरोपियों में से एक, वकील मोफक्केरुल इस्लाम (Mofakkarul Islam) को लेकर नई कानूनी पेचीदगियां सामने आई हैं। कोलकाता की नगर सत्र अदालत की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने गुरुवार को उन्हें एक मामले में जमानत दे दी है, लेकिन कई अन्य मामलों में नामजद होने के कारण फिलहाल उन्हें जेल से रिहाई नहीं मिल सकेगी।

​गुरुवार को मोफक्केरुल इस्लाम समेत कुल 49 आरोपियों को विशेष एनआईए अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश सुकुमार रॉय ने एक मामले में उन्हें 10,000 रुपये के निजी मुचलके (बांड) पर जमानत दे दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जमानत केवल एक विशिष्ट मामले में ही लागू होगी और अन्य मामलों के कारण उनकी न्यायिक हिरासत (जेल कस्टडी) बरकरार रहेगी। अदालत के निर्देशानुसार, एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में मोफक्केरुल इस्लाम को आगामी 30 अप्रैल 2026 तक जेल में ही रहना होगा। इस प्रकार, कानूनी रूप से जमानत मिलने के बावजूद उन्हें अभी रिहाई नहीं मिल रही है, जिससे कानूनी हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

​मालदा जिले के कालियाचक-2 ब्लॉक के बीडीओ (BDO) कार्यालय में जजों को बंधक बनाने और मोथाबाड़ी इलाके में विरोध प्रदर्शन की घटना को लेकर कुल 12 मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन घटनाओं में सुनियोजित तरीके से कानून-व्यवस्था को भंग किया गया था। बताया जा रहा है कि इन 12 मामलों में से कम से कम 5 मामलों में मोफक्केरुल इस्लाम का नाम सीधे तौर पर शामिल है।

​विशेष एनआईए अदालत के सूत्रों से पता चला है कि जिस मामले में उन्हें जमानत दी गई है, उसकी धाराएं तुलनात्मक रूप से हल्की और जमानती थीं। लेकिन बाकी मामलों में गंभीर आरोप हैं और उनकी जांच अभी जारी है। इसलिए अदालत ने उन मामलों में सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में मोफक्केरुल इस्लाम के साथ-साथ पत्रकार एकरामुल बागानी को भी एक मामले में जमानत मिलने की खबर है। हालांकि, अन्य मुकदमों के चलते उनके लिए भी कानूनी उलझनें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

​इस दिन अदालत में पेश किए गए 49 आरोपियों में से 12 को दो दिन की एनआईए (NIA) हिरासत में भेज दिया गया है। बाकी आरोपियों को अदालत ने 30 अप्रैल तक जेल में रखने का निर्देश दिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि घटना से जुड़े और अधिक महत्वपूर्ण तथ्य और सबूत जुटाने के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है।

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