





कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा की गई औपचारिक घोषणा के बाद, शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में मनोनीत किया गया है। 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभूतपूर्व जीत हासिल करते हुए राज्य में पहली बार सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।



भारी बहुमत से मिली जीत

चुनाव परिणामों के अनुसार, भाजपा ने राज्य की कुल 294 सीटों में से 207 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। दशकों से बंगाल की सत्ता पर काबिज क्षेत्रीय और वामपंथी दलों को बेदखल करने के भाजपा के प्रयासों को इस चुनाव में बड़ी सफलता मिली है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस जीत को “असली परिवर्तन” के रूप में देखा जा रहा है।
भवानीपुर और नंदीग्राम में मिली बड़ी जीत
इस चुनाव की सबसे बड़ी और प्रतीकात्मक जीत भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से आई, जहाँ शुभेंदु अधिकारी ने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही राजनीतिक गढ़ में पराजित किया। इसके साथ ही, अधिकारी ने अपनी पारंपरिक सीट नंदीग्राम को भी बरकरार रखा है।
अधिकारी ने हाल ही में नंदीग्राम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह अगले दस दिनों के भीतर अपनी दो सीटों में से एक छोड़ देंगे, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं भवानीपुर और नंदीग्राम के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं भूलूँगा।”
राजनीतिक सफर और ‘भूमिपुत्र’ की छवि
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक ग्राफ बंगाल की बदलती परिस्थितियों का प्रतिबिंब है। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे अधिकारी ने 2011 में वाममोर्चा के 34 साल पुराने शासन को समाप्त करने वाले नंदीग्राम आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उनका भाजपा में शामिल होना एक बड़ा मोड़ साबित हुआ, जिसने राज्य में भगवा दल की नींव को मजबूत किया।
भाजपा ने चुनावी अभियान के दौरान ‘भूमिपुत्र’ मुख्यमंत्री की अवधारणा पर जोर दिया था, जिसमें शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा था।
एक नए युग की शुरुआत
मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी का मनोनयन बंगाल की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है। भाजपा समर्थकों का मानना है कि यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य के विकास और प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव की शुरुआत है।





