





मिदनापुर: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक सराहनीय पहल की मांग की है। छात्रों का एक बड़ा हिस्सा चाहता है कि विश्वविद्यालय परिसर में ‘नो व्हीकल्स डे’ (No Vehicles Day) की व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाए।



क्या थी यह व्यवस्था?

कोरोना काल से पहले, तत्कालीन कुलपति रंजन चक्रवर्ती के कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में हर बुधवार को ‘नो व्हीकल्स डे’ मनाया जाता था। उस दिन छात्र-छात्राओं से लेकर शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी तक कोई भी अपना निजी वाहन (दोपहिया या चौपहिया) लेकर कैंपस के अंदर प्रवेश नहीं करता था। सभी को पैदल ही परिसर में आना होता था। यदि कोई वाहन लेकर आता भी था, तो उसे सुरक्षाकर्मियों द्वारा मुख्य द्वार के बाहर ही रुकवा दिया जाता था।
क्यों उठी मांग?
लॉकडाउन के दौरान यह व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई थी, जिसे बाद में फिर से शुरू नहीं किया जा सका। अब छात्र वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से लागू करना चाहते हैं।
छात्रों की राय: एमबीए विभाग के प्रथम वर्ष के छात्र मृणाल शील के अनुसार, सप्ताह में एक दिन इस नियम के पालन से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि कैंपस का माहौल भी शांत रहेगा और हॉर्न के शोर से मुक्ति मिलेगी।
पर्यावरण पर प्रभाव: भूगोल विभाग की छात्रा आलो नंदी का मानना है कि इस पहल से विश्वविद्यालय परिसर को प्रदूषण मुक्त रखने में काफी मदद मिलेगी।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंत्रियों और काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम करने का सुझाव दिया है, जिससे प्रेरणा लेकर छात्र अब इस दिशा में कदम उठाना चाहते हैं। हालांकि, इस विषय पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।








