​सरकारी शिक्षकों के प्राइवेट ट्यूशन पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से 3 हफ्ते में मांगा जवाब

April 7, 2026 1:25 PM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सरकारी और अर्ध-सरकारी स्कूलों के शिक्षकों द्वारा धड़ल्ले से चलाए जा रहे प्राइवेट ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि सरकारी पाबंदी के 8 साल बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?

​क्या है पूरा मामला?

राज्य में ‘वेस्ट बंगाल प्राइवेट ट्यूटर एसोसिएशन’ लंबे समय से शिकायत कर रहा है कि 2018 में जारी किए गए सरकारी गजट (जिसमें सरकारी शिक्षकों के ट्यूशन पढ़ाने पर रोक लगाई गई थी) की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकारी शिक्षक अपनी अतिरिक्त कमाई के लिए कुकुरमुत्ते की तरह कोचिंग सेंटर खोलकर बैठे हैं, जो कि पूरी तरह से गैरकानूनी है।

​इस मामले से जुड़ी कुछ अहम बातें:

​अभिभावकों पर दबाव: कई अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल के शिक्षक उन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाते हैं कि वे अपने बच्चों को उन्हीं के पास ट्यूशन पढ़ने के लिए भेजें।

​प्राइवेट ट्यूटर्स का नुकसान: जो लोग अपना घर चलाने के लिए पूरी तरह से प्राइवेट ट्यूशन पर निर्भर हैं, उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

​कार्रवाई का अभाव: एसोसिएशन के वकील आशीष कुमार चौधरी ने कोर्ट में बताया कि नियमों का उल्लंघन कर रहे शिक्षकों की लिस्ट राज्य सरकार को सौंपने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

​कोर्ट का फैसला और सख्त निर्देश

सोमवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने मध्य शिक्षा पर्षद (Board of Secondary Education) के वकील से कड़े सवाल किए। उन्होंने पूछा कि, “क्या आपके पास इस बात का कोई सबूत है कि आरोपी शिक्षकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई है?”

​चूंकि वकील के पास उस समय कोई लिखित रिपोर्ट मौजूद नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए:

​हलफनामा (Affidavit) तलब: राज्य सरकार और मध्य शिक्षा पर्षद को कोर्ट में हलफनामा जमा करके यह बताना होगा कि 2018 के सरकारी निर्देश और हाईकोर्ट के पिछले आदेशों का पालन कराने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।

​तीन हफ्ते का अल्टीमेटम: अदालत ने इस विस्तृत रिपोर्ट को जमा करने के लिए सिर्फ 3 सप्ताह का समय दिया है।

​कलकत्ता हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब शहर और उपनगरों में अवैध रूप से ट्यूशन पढ़ा रहे सरकारी शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

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