





पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान जहाँ कई हिस्सों से तनाव की खबरें आती रही हैं, वहीं खड़गपुर से सौहार्द और लोकतांत्रिक गरिमा की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। खड़गपुर निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के दिन दो प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी—भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रदीप सरकार—एक-दूसरे से गर्मजोशी के साथ मिलते नजर आए।



मतदान केंद्रों का संयुक्त निरीक्षण:

दशक भर से राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के आमने-सामने रहने वाले इन दोनों दिग्गजों ने मतदान केंद्र का दौरा किया। इस दौरान न केवल उन्होंने हाथ मिलाया, बल्कि काफी देर तक चुनावी माहौल पर चर्चा भी की।
दिलीप घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम पिछले 10 सालों से एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन हमारी आपसी दोस्ती बरकरार है। जनता जिसे चाहेगी, उसे चुनेगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमारे व्यक्तिगत संबंध खराब हों।”
‘खड़गपुर मॉडल’ की चर्चा:
प्रदीप सरकार ने भी इस सकारात्मक माहौल की सराहना की। जब मीडिया ने उनसे शांतिपूर्ण मतदान पर सवाल किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह ‘खड़गपुर मॉडल’ है। उन्होंने कहा कि मतदान पूरी तरह से भयमुक्त और शांतिपूर्ण रहा है, जो लोकतंत्र के लिए एक शुभ संकेत है।
दोनों नेताओं के बीच की यह केमिस्ट्री सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। समर्थकों ने भी अपने नेताओं के नक्शेकदम पर चलते हुए शांति बनाए रखी, जिससे क्षेत्र में मतदान प्रतिशत में भी बढ़ोतरी देखी गई।
प्रमुख बिंदु:
•उच्च मतदान प्रतिशत: अनुमान लगाया जा रहा है कि खड़गपुर में मतदान 85% से ऊपर जा सकता है।
•शांतिपूर्ण प्रक्रिया: छिटपुट ईवीएम (EVM) समस्याओं को छोड़कर, प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी के बीच मतदान सुचारू रहा।
•जीत का दावा: भाजपा के दिलीप घोष ने 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत की उम्मीद जताई है, जबकि टीएमसी ने भी अपनी पकड़ मजबूत होने का दावा किया है।
यह मुलाकात न केवल राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आपसी सम्मान का उदाहरण है, बल्कि खड़गपुर के नागरिकों के लिए भी एक गर्व का क्षण है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग किया।





