





कोलकाता: चुनाव हारने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शीर्ष नेतृत्व क्यों नहीं खड़ा है? यह सवाल पार्टी के अंदर ही उठने लगा था और एक के बाद एक कई नेताओं ने इसे उठाया था। इस सवाल के जवाब में अब तृणमूल कांग्रेस सीधे सड़क पर उतरने जा रही है। चुनाव के बाद हुई हिंसा का आरोप लगाते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी आगामी 2 जून को कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में एक दिवसीय धरने पर बैठ रही हैं।



दूसरी ओर, उसी दिन यानी 2 जून को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी बीरभूम के नानूर का दौरा करने वाले हैं। नानूर में चुनाव के बाद हुई ‘हिंसा’ के कारण घायल और प्रभावित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से वह मुलाकात करेंगे। उनके साथ खड़े होकर कानूनी और वित्तीय मदद का आश्वासन देने के साथ-साथ, अभिषेक इलाके की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का भी जायजा लेंगे।

ज्ञात हो कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही राज्य की कानून व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा चल रही है। चुनाव के बाद हुई हिंसा का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। उन्होंने खुद वकील की पोशाक पहनकर अदालत में जाकर अपनी बात रखी थी। हालांकि, वहां भी उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा और क्षुब्ध वकीलों के एक गुट ने उन्हें घेरकर नारेबाजी की थी। दूसरी तरफ, चुनाव के बाद से अभिषेक बनर्जी को इस तरह से सक्रिय रूप से सड़क पर उतरते हुए अभी तक नहीं देखा गया था।







