






नंदीग्राम: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम के उपचुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। नाटकीय घटनाक्रम के तहत पहले तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान दे (Sanchita Pradhan Dey) ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। लेकिन इस सियासी दांव के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने नंदीग्राम की चुनावी लड़ाई को बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है।


ममता बनर्जी का बड़ा सियासी दांव: कांग्रेस को समर्थन का ऐलान

नंदीग्राम में टीएमसी उम्मीदवार द्वारा नाम वापस लिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने चौंकाने वाला फैसला लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की कि नंदीग्राम में उनकी पार्टी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगी। ममता बनर्जी ने राहुल गांधी से बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही कांग्रेस को समर्थन देने के पक्ष में थी।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जिस कांग्रेस को पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी लगातार दरकिनार करती रही थीं, उपचुनाव के इस नाजुक मोड़ पर उसी कांग्रेस का हाथ थामना राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है।
समर्थन मिलते ही पुलिसिया कार्रवाई: चंडीपुर के पास मिलन प्रधान गिरफ्तार
ममता बनर्जी द्वारा समर्थन की घोषणा किए जाने के कुछ ही समय बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को हिरासत में ले लिया। जानकारी के अनुसार, जब मिलन प्रधान चंडीपुर से नंदीग्राम की ओर जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई एक पुराने हत्या के मामले में जारी अरेस्ट वारंट के आधार पर की गई है। गिरफ्तारी के बाद जिला और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में हड़कंप मच गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: अधीर रंजन चौधरी का सरकार और बीजेपी पर हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की टाइमिंग पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
जब मिलन प्रधान ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने नामांकन दाखिल किया था, तब कोई शिकायत सामने नहीं आई।
लेकिन जैसे ही तृणमूल के हटने के बाद मुकाबला सीधा हुआ, विरोधियों को अपनी हार का डर सताने लगा और आनन-फानन में पुलिस कार्रवाई की गई।
चौधरी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को अदालत में ले जाएगी और चुनाव मैदान में मजबूती से लड़ेगी।
ममता बनर्जी के समर्थन पर तंज कसते हुए अधीर रंजन चौधरी ने यह भी कहा कि जब तृणमूल की अपनी ही उम्मीदवार मैदान छोड़कर हट गईं, तो मजबूरी में ममता बनर्जी को कांग्रेस को दूसरा विकल्प मानना पड़ा।
बीजेपी का पलटवार: हलफनामे और कानून के पालन का मुद्दा
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने गिरफ्तारी का बचाव करते हुए कहा कि यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ पुराना आपराधिक मामला या गैर-जमानती वारंट लंबित था और उसने चुनावी हलफनामे में यह जानकारी छिपाई, तो यह कानूनी अपराध है। बीजेपी ने दावा किया कि जनता कांग्रेस, तृणमूल और वाम दलों की अवसरवादी राजनीति को नकार चुकी है और उपचुनाव में जनता का विश्वास केवल भाजपा के साथ है।
निष्कर्ष: नंदीग्राम में अब आगे क्या?
प्रत्याशी की गिरफ्तारी और तृणमूल की आंतरिक खींचतान के बीच नंदीग्राम का चुनाव अब कानूनी दांवपेचों और तीखे राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। अदालत का रुख क्या रहता है और कांग्रेस इस परिस्थिति में अपना अभियान कैसे आगे बढ़ाती है, इस पर पूरे बंगाल की नजरें टिकी हुई हैं।






