





पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने कमर कस ली है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने घोषणा की है कि दूसरे चरण के मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाया जाएगा, जिसके लिए लगभग 2200 से 2300 केंद्रीय बलों की कंपनियाँ तैनात की जाएंगी।



बर्धमान में चुनाव अधिकारियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद CEO ने यह जानकारी साझा की। आयोग के अनुसार, दक्षिण बंगाल में कई ‘संवेदनशील’ बूथों की पहचान की गई है, जहाँ अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ:
•क्विक रिस्पांस टीम (QRT): चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि हर 10 मतदान केंद्रों (बूथों) पर एक QRT टीम तैनात रहेगी। किसी भी आपात स्थिति या गड़बड़ी की सूचना मिलने पर यह टीम तुरंत मौके पर पहुंचेगी।
•तकनीक का सहारा: सुरक्षा बल गूगल मैप्स की सहायता से संकरी गलियों और दूर-दराज के इलाकों में तेजी से पहुँच सकेंगे। इसके साथ ही, न केवल मतदान केंद्रों के भीतर बल्कि बाहर जाने वाले रास्तों पर भी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि उपद्रवियों पर नज़र रखी जा सके।
•एरिया डोमिनेशन: सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए संकरी गलियों में मोटर साइकिल के जरिए गश्त (पेट्रोलिंग) की जाएगी। इसका उद्देश्य मतदाताओं के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसना है।
रविवार को कोलकाता के धनधान्य स्टेडियम में भी एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें कोलकाता पुलिस कमिश्नर, जिला निर्वाचन अधिकारियों और पर्यवेक्षकों ने हिस्सा लिया। आयोग का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।







