





खड़गपुर: चुनावी प्रचार के इस सरगर्मी भरे माहौल में एक कानूनी नोटिस ने खड़गपुर की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह कानूनी नोटिस दीपेंदु नारायण बनर्जी नामक एक वकील द्वारा भेजा गया है।



ज्ञात हो कि पिछले साल दिसंबर में, नागरिकों को उचित सेवाएं प्रदान करने में विफल रहने की शिकायतों के आधार पर, राज्य के शहरी विकास विभाग ने खड़गपुर नगर पालिका की चेयरपर्सन कल्याणी घोष को ‘शो-कॉज’ (कारण बताओ) नोटिस जारी किया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर बोर्ड को भंग करने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके जवाब में चेयरपर्सन ने बोर्ड मीटिंग बुलाकर अपना स्पष्टीकरण भेजा था। उस जवाब के आधार पर खड़गपुर के महकमा शासक (SDO) से नगर पालिका की जांच कराई गई और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुरबोर्ड (नगरपालिका बोर्ड) को भंग कर दिया गया था, जिसके बाद नगर पालिका की जिम्मेदारी प्रशासक के हाथों में सौंप दी गई थी।

राज्य के शहरी विकास विभाग के इस निर्देश को चुनौती देते हुए चार कांग्रेस पार्षदों ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजा बसु चौधरी की सिंगल बेंच ने नगर पालिका की जिम्मेदारी वापस निर्वाचित बोर्ड के हाथों में सौंप दी थी।
लेकिन, बीते 8 अप्रैल को जब चुनाव प्रचार जोरों पर था, ठीक उसी समय हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में एक अपील दायर की गई है। इस आवेदन की कॉपी पार्षद पारमिता घोष, अपर्णा घोष, रीता शर्मा और विष्णु बहादुर कामी को भी भेजी गई है।
हाल ही में जब राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम चुनाव प्रचार के सिलसिले में खड़गपुर आए, तो चेयरपर्सन कल्याणी घोष और वाइस-चेयरपर्सन तैमूर अली खान ने उनसे इस नोटिस के बारे में जानना चाहा। इस पर फिरहाद हकीम ने सीधे तौर पर कहा कि उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शहरी और नगर विकास विभाग के कुछ लोगों को प्रभावित करके इस नोटिस को भेजने की पहल की गई है। इस नोटिस को लेकर खड़गपुर शहर के तृणमूल नेताओं के बीच अविश्वास का एक माहौल पैदा हो गया है। राजनीतिक हलकों का मानना है कि इसके परिणामस्वरूप तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी कलह ने और भी तीव्र रूप ले लिया है।





