





विधानसभा चुनाव के माहौल में पश्चिम बंगाल में एक बार फिर सत्ताधारी और विपक्षी दल के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। राज्य की महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने के वादे के साथ बीजेपी द्वारा ‘मातृशक्ति भरोसा’ कार्ड छपवाने और उसे घर-घर बांटने पर ममता बनर्जी की पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है।



क्या है यह नया विवाद?

बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर राज्य की महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये का भत्ता दिया जाएगा। हाल ही में बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस वादे पर मुहर लगा दी। हालांकि घोषणा पत्र में ‘निम्न’ और ‘निम्न मध्यम वर्ग’ की महिलाओं का जिक्र था, लेकिन बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्मृति ईरानी ने स्पष्ट किया कि इसमें कोई भेदभाव नहीं होगा, बल्कि बंगाल की हर महिला इस भत्ते के दायरे में आएगी।
स्मृति ईरानी ने शुभेंदु अधिकारी और रूपा गांगुली की मौजूदगी में ‘मातृशक्ति भरोसा’ कार्ड लॉन्च किया और प्रतीकात्मक रूप से कुछ महिलाओं को यह कार्ड सौंपा भी गया।
टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी महिला मोर्चा की कार्यकर्ता पहले ही विभिन्न इलाकों में घर-घर जाकर इस कार्ड के फॉर्म बांटने और महिलाओं की जानकारी इकट्ठा करने का काम शुरू कर चुकी हैं। वहीं, बीजेपी का दावा है कि सत्ता में आने पर यह पैसा ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के तहत दिया जाएगा।
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की कड़ी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर मतदाताओं को लुभाने की रणनीति बताते हुए तीखा हमला बोला। नाराज मुख्यमंत्री ने कहा, “बीजेपी पैसों का बंडल लेकर आई है। अभी से राज्य में पैसे बांट रही है। एक कार्ड भी बांटा जा रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि वोट के बाद महिलाओं को पैसे दिए जाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “चुनाव से पहले पैसे का लालच देकर कार्ड बांटने की हिम्मत कैसे हो रही है, यह आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। मैं चुनाव आयोग का ध्यान इस ओर आकर्षित कर रही हूं और मांग करती हूं कि इस कार्ड का वितरण तुरंत रोका जाए।”








