





पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में हार-जीत के समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। तमलुक नगर पालिका के पार्षदों के बीच इन दिनों एक अलग ही हलचल देखने को मिल रही है। परिणाम घोषित होने से पहले ही, विभिन्न दलों के पार्षद अपने-अपने वार्डों में मिली ‘लीड’ (बढ़त) का हिसाब लगाने में व्यस्त हैं।



वार्ड के प्रदर्शन पर टिकी प्रतिष्ठा:

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तमलुक नगर पालिका के अधिकांश पार्षद इस समय अपने बूथों के डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। उनके लिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का भी सवाल है। पार्षद यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके वार्ड के मतदाताओं ने उनकी पार्टी के पक्ष में कितना समर्थन दिया है। किस गली या किस बूथ से कितनी बढ़त मिली और कहाँ पार्टी पिछड़ी, इसका विस्तृत चार्ट तैयार किया जा रहा है।
पार्टी नेतृत्व की नजर:
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन वार्ड-वार आंकड़ों का असर भविष्य में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और पार्टी के भीतर पार्षदों के कद पर भी पड़ेगा। जिन पार्षदों के वार्ड से पार्टी को अच्छी बढ़त मिलेगी, उनका वर्चस्व बढ़ना तय है। वहीं, कम बढ़त या पिछड़ने वाले वार्डों के पार्षदों को नेतृत्व के कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
चाय की दुकानों से दफ्तरों तक चर्चा:
तमलुक शहर के चौक-चौराहों और चाय की दुकानों पर भी यही चर्चा आम है। समर्थक अपने-अपने पसंदीदा पार्षदों के पक्ष में दावे कर रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि उन्होंने विकास के नाम पर वोट मांगा था, अब देखना यह है कि जनता ने उस पर कितनी मुहर लगाई है।
फिलहाल, आधिकारिक नतीजों से पहले तमलुक के पार्षद ‘कैलकुलेटर’ लेकर अपनी राजनीतिक जमीन को मापने में जुटे हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है और किसके दावे सच साबित होते हैं।






