




कोलकाता: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को भवानी भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राज्य पुलिस को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक कदम उठाने की घोषणा की। राज्य में किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए मंच से मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने 4 टोल-फ्री नंबरों का भी ऐलान किया। इस अहम कार्यक्रम में शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल, मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


पुलिस विभाग में 1 लाख भर्तियां और यूपी मॉडल

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंच से राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस की गरिमा को फिर से स्थापित करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल अब उत्तर प्रदेश सरकार के मॉडल का अनुसरण करेगा, जहां प्रति एक लाख की आबादी पर 200 पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने घोषणा की, “हम 1 लाख पुलिसकर्मी लेंगे। वर्तमान में 57 हजार पद खाली हैं।” इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि जो कांस्टेबल पहले ही अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं, उन्हें दुर्गा पूजा से पहले ड्यूटी पर लगा दिया जाएगा।
एनआईए (NIA) की तर्ज पर बनेगा एसआईए (SIA)
राष्ट्रीय सुरक्षा और जांच को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि राज्य में NIA की तर्ज पर ‘राज्य जांच एजेंसी’ (SIA) के गठन की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, महिला पुलिसकर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश दिया गया है कि महिला कांस्टेबलों को उनके गृह जिले में और महिला अधिकारियों को उनके पड़ोसी जिलों में तैनात किया जाए।
बुनियादी ढांचे का विकास और तकनीकी अपग्रेड
मुख्यमंत्री ने राज्य के 552 पुलिस स्टेशनों की खस्ताहाल स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि ज्यादातर थानों में बुनियादी ढांचे, जैसे- बिल्डिंग, बैरक और जिम की भारी कमी है। अब भारत सरकार की मदद से पुलिस के बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है।
पुलिस को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए सीसीटीवी, बॉडी कैमरा और अन्य तकनीकी सुविधाएं प्रदान करने के लिए विशेष फंड आवंटित किया गया है। इसके अलावा, पुलिस के जो वाहन 15 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं और जिनका बीमा नहीं है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाकर नए वाहन लाए जा रहे हैं।
”राजनीतिक रैलियों में नहीं होगा पुलिस का इस्तेमाल”
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “हम कभी भी पुलिस की यूनिफॉर्म उतरवाकर उन्हें राजनीतिक रैलियों या बैठकों (मीटिंग-मिचिल) में इस्तेमाल नहीं करेंगे।”






