दीपक दास गुप्ता के खिलाफ मानहानि का मामला खारिज, नीमपुरा आर्य विद्यापीठ के प्रधानशिक्षक ने किया था मामला

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रघुनाथ प्रसाद साहू /9434243363

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https://youtu.be/TvFqrrwVew4

खड़गपुर। ज्योतिष व समाजसेवी दीपक दास गुप्ता के खिलाफ एक करोड़ रु के मानहानि का मामला न्यायालय ने खारिज कर दिया है। ज्ञात हो कि नीमपुरा आर्य विद्यापीठ के प्रधानशिक्षक चंडी चरण त्रिपाठी दीपक के खिलाफ मामला दायर कर एक करोड़ बतौर क्षति पूर्ति की मांग किया था। खड़गपुर महकमा अदालत के सीनियर डिवीजन सिविल जज पराग नियोगी ने मामले पर राय जाहिर करते हुए वादी पक्ष चंडी चरण त्रिपाठी की मांग को खारिज कर दिया। बचाव पक्ष के वकील  दिलीप कुमार भट्टाचार्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानशिक्षक त्रिपाठी ने अपनी मांग  के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जिसके कारण जज ने त्रिपाठी की मांग को खारिज कर दिया। ज्ञात हो कि नीमपुरा आर्य विद्यापीठ में मिड डे मिल में अनियमितता सहित कई मुद्दों को दीपक दास गुप्ता ने मीडिया में उठाया जिससे नाराज होकर प्रधानाध्यापक ने सन 19 में मानहानी का मामला दायर किया था शुरु में मामला मेदिनीपुर न्यायालय परिसर में चल रहा था पर खड़गपुर महकमा कोर्ट खुल जाने के बाद मामले की सुनवाई खड़गपुर महकमा कोर्ट में चल रहा था। दीपक दास गुप्ता ने कोर्ट के राय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्कुल के छात्र छात्राओं व अभिभावको व शिक्षाप्रेमियों की जीत है। उन्होने कहा कि चूंकि उस स्कुल में उसके बच्चे पढ़ाई करते थे व इप्सिता मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से शहर के विभिन्न स्कुलों में वे लोग पहले पाठ्य पुस्तक फिर अन्य पाठ्य सामग्री वितरित कर बच्चों को सहयोग करते थे जिसका लाभ भी उक्त स्कुलों को मिलता रहा है पर स्कुलें में भर्ती, आडिट कराने व मिड डे मिल सहित अऩ्य अनियमितता पाए जाने के बाद उन्होने मीडिया के माध्यम से मामले का उजागर किया पर प्रधानाध्यापक ने इसे बेवजह अपने सम्मान से जोड़ उसके खिलाफ मामला दायर कर दिया उन्होने कहा कि मामले की शिकायत शिक्षा विभाग, जिलाशासक व अन्य जगहों में की गई थी जिसका जांच भी हुआ लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं चल पाया। उन्होने कहा कि बीते तीन साल में उसे बेवजह कानूनी लड़ाई में फंसाया गया पर आखिरकार सच की जीत से वे खुश है। उन्होने कहा कि तत्कालीन जिलाशासक पी मोहनगांधी ने उसे जो नैतिक समर्थन दिया उससे वे अभिभूत है। बचाव पक्ष के वकील दिलीप भट्टाचार्य  ने कहा कि प्रधानाध्यापक ने मामला दायर करने के लिए विभागीय अनुमति नहीं लेकर व्यक्तिगत तौर पर किया था जो कि उनलोगों के पक्ष में रहा। कोर्ट की राय को लेकर प्रधानाध्यापक चंडी चरण त्रिपाठी से संपर्क करने की कोशिश की गई पर संपर्क ना होने से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सका।

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