स्विस टीम ने डॉन बास्को के स्कूली बच्चों को ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के गुर सिखाए , युवाओं को दे रही है प्रशिक्षण

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kharagpur, A team from Swiss Embassy visited Don Bisco school today for a *WORKSHOP WITH GRADE VII – XI STUDENTS*
*Swiss It On Wheels flagship project*
The following personnels conducted the workshop
1. Ms. Priyal Sudan (Visa officer from Embassy of Switzerland in New Delhi)
2. Mr. Solomon George (Human resources and administration Manager, Consulate General of Switzerland in Bangalore) and
3. Mr. Govindan Kannan (technical staff ) and
4. Mr. Ajay Sinchori from (Embassy of Switzerland in New Delhi)

The project bus is touring (virtual

ly and physically) through 28 Indian cities, aiming to engage with young adults (13-18 years) on the crucial theme of *sustainability through talks, films, activities, and experiments.*
The bus brings a slice of Swissness right into our school, and sensitizes our students on how to care for their immediate environment.
The team presented low-tech clean solutions to
1. counter indoor air and water pollution,
2. simplify waste segregation and recycling,
3. measure one’s carbon footprint, and so on.

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They showcased smart Swiss eco-solutions with operations or partners in India, such as Lifestraw water filter.

This one day workshop (the entered in Don Bosco school campus today.” It was a wonderful opportunity and experience for our students to appreciate how they can tackle big challenges like global warming through small solutions and adaptations at school and home”. said R K MOSES, principal, DON BOSCO SCHOOL KHARAGPUR.

विद्यालय में ग्रेड ७वीं से ११वीं तक के विद्यार्थियों हेतु कार्यालय चलाने के उद्देश्य से स्विस दूतावास दल द्वारा “पहियों पर मुख्य स्विस परियोजना(Swiss It On Wheels flagship)” का दौरा हुआ ।
ये कार्यक्रम  निम्न अधिकारियों द्वारा संचालित रही —

1) सुश्री प्रियाल सूडान (नई दिल्ली के स्विटजरलैंड दूतावास में वीसा अधिकारी),
2) श्री सोलोमन जार्ज (मानव संसाधन व प्रबंधन अधिकारी, बंगलुरु स्तिथ स्विटजरलैंड
महावाणिज्य दूत ),
3) श्री गोविन्दन कन्नन (तकनीकी सदस्य), और
4) श्री अजय शिनछोरी (भारत स्तिथ स्विटजर- लैंड दूतावासी )
परियोजना-बस १३-१८वर्षों के बच्चों समक्ष “वहनीयता” (स्थिरता), की प्रमुखता को समझाने के उद्देश्य से काल्पनिक व भौतिक तरीके से बातचीत, फिल्म, विभिन्न क्रीडाएं और प्रयोगों के माध्यम भारत के २८ शहरों में भ्रमण कर रही है।
इस वाहन के जरिये स्विस की सोच ने हमारे बच्चों को प्रभावित किया कि वे किस तरह से अपने वातावरण की देखभाल करते हैं।
दल ने सफाई की निम्न तकनीक से समाधान की प्रस्तुति दी …
1) चारदीवारी भीतर वायु एवं जल प्रदूषण का विरोध करना।
2)बेकार व दूषित पदार्थों का अलग करना और पुनः उपयोग में लाने की प्रक्रिया चलाना।
3) किन्हीं दूसरों की उपलब्धता की कार्बन व फुटप्रिंटों को आंकना और उसी तरह जाना।

उनलोंगो ने भारत में  सहभागियों से जीवनदायी जल-संशोधन जैसे विषयों पर निपुण पारिस्थिकी तंत्र की समस्या व निदन पर चर्चा की।
एक दिवसीय कार्यशाला विद्यालय के प्रांगण में सुबह 9:15 बजे प्रविष्ट हुई और बच्चों के लिए यह अद्भुत अनुभव का एक खूबसूरत योग रहा कि किस तरह से वे ग्लोबल वार्मिग जैसे के विरुद्ध लडने हेतुघर और विद्यालय में
सूक्ष्म समाधानों के माध्यम को अपनाया जाय।

সুইস দূতাবাসের একটি দল আমাদের স্কুল পরিদর্শন করে সপ্তম থেকে একাদশ শ্রেণীর ছাত্র-ছাত্রীদের সঙ্গে একটি কর্মশালায় অংশগ্রহণ করেছিল।
*সুইস ইট অন হুইলস ফ্ল্যাগশিপ প্রকল্প*
নিম্নলিখিত কর্মীরা কর্মশালা পরিচালনা করেন:
1. মিসেস প্রিয়াল সুদান (নিউ দিল্লিতে সুইজারল্যান্ডের দূতাবাসের ভিসা অফিসার)
2. মিঃ সলোমন জর্জ (মানব সম্পদ ও প্রশাসন ব্যবস্থাপক, সুইজারল্যান্ডের কনস্যুলেট জেনারেল) এবং
3. মিঃ গোবিন্দন কানন (প্রযুক্তিগত কর্মী) এবং
4. মিঃ অজয় ​​সিনচোরি (নিউ দিল্লিতে সুইজারল্যান্ডের দূতাবাস)

প্রজেক্ট বাসটি 2৮ টি ভারতীয় শহরে (ভার্চুয়ালি এবং শারীরিকভাবে) ভ্রমণ করছে, যাদের লক্ষ্য তরুণ প্রাপ্তবয়স্কদের (১৩-১৮ বছর) সাথে কথা বলা, এবং কার্যকলাপ ও পরীক্ষা-নিরীক্ষার মাধ্যমে তাদের লক্ষ্য নির্দিষ্ট করা।
বাসটি আমাদের স্কুলে আসে এবং আমাদের শিক্ষার্থীদের কীভাবে তাদের তাৎক্ষণিক পরিবেশের যত্ন নিতে হয় সেই সম্পর্কে সংবেদনশীল করে।

এই একদিনের কর্মশালা উপলক্ষে বাসটি আমাদের স্কুল ক্যাম্পাসে সকাল ৯ টা ১৫তে প্রবেশ করেছিল। এটি আমাদের শিক্ষার্থীদের জন্য একটি দুর্দান্ত সুযোগ এবং অভিজ্ঞতা ছিল যে তারা কীভাবে স্কুল এবং বাড়িতে ছোট সমাধান এবং অভিযোজনের মাধ্যমে গ্লোবাল ওয়ার্মিংয়ের মতো বড় চ্যালেঞ্জগুলি মোকাবেলা করতে পারে। দারুণ অভিজ্ঞতার সম্মুখীন হয়েছিল তারা।

*ডন বসকো স্কুল খড়গপুর*

 

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