🗳️ वोटर लिस्ट में ‘भूतिया नामों’ की एंट्री! दो ERO को चुनाव आयोग की कड़ी चेतावनी
वोटर लिस्ट में संदिग्ध और ‘भूतिया’ नामों की भरमार को लेकर चुनाव आयोग ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। पश्चिम बंगाल के नंदकुमार (पूर्व मेदिनीपुर) और राजरहाट‑गोपालपुर (उत्तर 24 परगना) विधानसभा क्षेत्रों में तैनात इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) ने सख्त चेतावनी दी है।
👉 क्या मिला जांच में?
नमूना सर्वे में सामने आया कि 102 नए मतदाताओं के नाम बिना जरूरी दस्तावेज़ों की जांच के ही वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए। इनमें से 59 नाम अकेले राजरहाट‑गोपालपुर क्षेत्र से जुड़े हैं।
👉 कैसे हुई ये गलती?
ERO अधिकारियों का तर्क है कि हाल ही में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान एक दिन में 40–50 आवेदन आने लगे, जिन्हें तेज़ी से मंजूर करने की जल्दबाज़ी में कई नाम बिना सही वेरीफिकेशन के ही जोड़ दिए गए।
👉 सबसे गंभीर मुद्दा क्या है?
CEO दफ्तर ने पाया कि ERO अधिकारियों ने लॉग‑इन ID और OTP अपने सहायकों को इस्तेमाल करने दिया – जो चुनाव आयोग की गाइडलाइन के खिलाफ है। OTP केवल अधिकृत अधिकारी के मोबाइल पर आने के बाद ही इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन इस नियम की धज्जियां उड़ाई गईं।
👉 राजनीतिक विवाद भी भड़का
इसी बीच भाजपा ने आरोप लगाया कि मेदिनीपुर नगर पालिका के एक वार्ड में 49 मृत व्यक्तियों के नाम अब भी वोटर लिस्ट में बने हुए हैं। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि चुनाव की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
👉 CEO का साफ संदेश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा –
> “वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए हड़बड़ी करने की कोई ज़रूरत नहीं है। बिना सही दस्तावेज़ जांच के नाम जोड़ना गंभीर अपराध है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
✅ क्यों है मामला गंभीर?
अगर बिना जांच ‘भूतिया नाम’ लिस्ट में जुड़ते रहे, तो फर्जी वोटिंग, चुनावी गड़बड़ी और पारदर्शिता पर सवाल उठना तय है। यही वजह है कि चुनाव आयोग ने साफ संकेत दे दिया है कि ERO अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी।
यह खबर न केवल मतदाता जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि प्रशासन को भी चेतावनी देती है कि लोकतंत्र की सबसे अहम प्रक्रिया – वोटिंग – में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।