‘मैनेज’ करने के लिए कर्मचारी तक नहीं, भीड़ में संघर्ष करती मेट्रो सेवा
कोलकाता मेट्रो रेल की “ब्लू-लाइन” पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। हाल ही में लगातार चार नई मेट्रो लाइनों के विस्तार और उद्घाटन के बाद यात्री संख्या में भारी उछाल आया है, लेकिन सेवाओं की परिचालन क्षमता ध्वस्त हो गई है। अब यात्री सुविधा नहीं बल्कि सुरक्षा ही चिंतित करने वाला विषय बन चुकी है।
भीड़ का अतिक्रमण, सेवा की गिरावट:
दिन के किसी भी वक्त—सुबह 8:47 बजे दामदम, 9:53 बजे शियालदह, 11:22 बजे एस्प्लेनाड, दोपहर 2:32 बजे तालिगंज—हर प्रमुख स्टेशन पर तस्वीर एक जैसी है: घनों भीड़ से गुज़रना मुश्किल, प्लेटफ़ॉर्म पर धक्का-मुक्की और ट्रेन पकड़ने में दिक्कतें। इस भीड़ की स्थिति तेजी से सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट के साथ जुड़ी हुई है।
यात्री संख्या का विस्फोटक बढ़ाव:
ब्लू-लाइन पर प्रतिदिन औसतन साढ़े पाँच लाख यात्री यात्रा कर रहे हैं। वहीं, एस्प्लेनाड–शियालदह सेक्शन जुड़ने के बाद ग्रीन लाइन की दैनिक यात्री संख्या दो लाख से ऊपर पहुंच गई है। इस तरह कुल मिलाकर मेट्रो पर प्रतिदिन लगभग आठ लाख लोग निर्भर हैं—एक अभूतपूर्व प्रसार जो परिचालन व्यवस्था से परे है।
कर्मी संकट: “मैनेज” की जिम्मेदारी ही नहीं बची:
मेट्रो रेलवे प्रगतिशील श्रमिक संगठन ने कहा है कि समस्या का मूल कारण कर्मचारी संख्या का अभाव है। मेट्रो में प्राधिकृत 509 मोटरमैन पदों में केवल 260 ही कार्यरत हैं—लगभग 50% रिक्त पद। जहां ग्रीन लाइन में 60 मोटरमैन पदों में सिर्फ 45 व्यक्ति कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, ट्रैफिक विभाग में स्टेशनों पर व्यवस्था को संभालने के लिए 600 से अधिक रिक्तियां हैं।
यूनियन के संयुक्त अध्यक्ष शुभाशिस सेनगुप्ता का कहना है कि पिछले कई वर्ष से यह समस्या बढ़ रही थी। जब केवल एक लाइन चलती थी, समस्या हद तक सीमित थी। लेकिन जैसे-जैसे लाइनों में विस्तार हुआ, रिक्तियों का संकट भयावह हो गया। रातों-रात कर्मियों की भर्ती कर भी इस अत्यधिक दबाव को संभाला नहीं जा सकता।
पदोन्नत लेकिन अनुभवहीन—एक और समस्या:
ट्रैफिक असिस्टेंट (टीए) पद पर कार्यरत कई कर्मचारियों को वरिष्ठ टीए (एसटीए) बना दिया गया है, लेकिन इनके पास स्टेशनों का संचालन संभालने का अनुभव नहीं है। ऐसे में भीड़-भाड़ और यात्री प्रबंधन में वृद्धि हुई जिम्मेदारी का बोझ झेलना इनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
सारांश:-
समस्या विवरण-
यात्री संख्या विस्फोट प्रतिदिन ~8 लाख उपयोगकर्ता; ब्लू-लाइन पर ~5.5 लाख
कर्मचारी अभाव मोटरमैन में 50% रिक्तता, ट्रैफिक विभाग में 600+ रिक्त पद
परिचालन असंतुलन अनुभवहीन कर्मियों के कारण भीड़ और परिचालन असमंजस
सेवा का पतन ट्रेन देरी, प्लेटफ़ॉर्म की भीड़, यात्री असुविधा
इस स्थिति में मेट्रो प्रशासन के लिए तत्काल कदम उठाना नितांत आवश्यक है—चाहे वह कर्मियों की भर्ती हो, अनुभवहीन कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना हो, या परिचालन और यात्री प्रबंधन की रणनीति में पुनर्विचार—ताकि शहर की ‘लाइफ लाइन’ फिर से भरोसेमंद बन सके।