‘डॉक्टर’ की उपाधि नहीं होगी फिजियोथेरेपिस्ट के नाम से पहले: DGHS की स्पष्ट घोषणा
स्वास्थ्य मंत्रालय की महत्त्वपूर्ण इकाई, Directorate General of Health Services (DGHS) ने स्पष्ट किया है कि फिजियोथेरेपिस्ट्स अपने नाम से पहले “डॉक्टर” (Dr.) उपाधि का प्रयोग नहीं कर सकते। DGHS का कहना है कि इस तरह की उपाधि प्रयोग करने से जनता और रोगियों में भ्रम हो सकता है।
DGHS की ओर से भेजे गए उस पत्र में बताया गया है कि फिजियोथेरेपिस्ट्स मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की तरह की शिक्षा-प्रशिक्षण नहीं लेते, और इसलिए “डॉक्टर” की उपाधि उनके लिए उपयुक्त नहीं है। पत्र में कहा गया है कि फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम में हाल ही में किए गए संशोधन में कुछ संगठनों ने यह प्रस्ताव रखा था कि फिजियोथेरेपिस्ट्स को “Dr.” उपसर्ग प्रयोग करने की अनुमति दी जाए। लेकिन DGHS का मानना है कि यह प्रस्ताव वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टि से सही नहीं है।
पत्र में DGHS ने 2003, 2022 तथा 2023 में हुए तीन न्यायालयीय फैसलों का हवाला दिया है — पटना हाई कोर्ट, बेंगलुरु हाई कोर्ट, और मद्रास हाई कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख किया गया है। उन मामलों में कोर्ट ने निर्णय दिया था कि बिना चिकित्सा (मेडिकल) डिग्री वाले व्यक्ति “डॉक्टर” की उपाधि नहीं प्रयोग कर सकते। यदि कोई ऐसा करता है, तो यह कानून के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है।
अभी-अभी DGHS यह भी कह रहा है कि पाठ्यक्रमों में जल्द बदलाव किया जाए ताकि उन शब्दों का प्रयोग निर्धारित हो सके जिन्हें फिजियोथेरेपिस्ट्स द्वारा प्रयोग करने से रोगियों व आम जनता में भ्रम न हो। इससे यह स्पष्ट होगा कि वे किस तरह से पेशेवर सेवा कर रहे हैं और उनकी शिक्षा व जिम्मेदारियाँ किस प्रकार निर्धारित हैं।