





खड़गपुर: चुनाव में मिली करारी हार के बाद खड़गपुर के राजनीतिक गलियारों में निराशा का माहौल है। वार्ड नंबर 25 स्थित पार्टी कार्यालय, जो कभी कार्यकर्ताओं की भीड़ से गुलजार रहता था, आज पूरी तरह से सूना पड़ा है। इस सन्नाटे और हार की हताशा पर पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद के पूर्व कर्माध्यक्ष और वरिष्ठ नेता निर्मल घोष ने अपना भारी असंतोष व्यक्त किया है।



वरिष्ठ नेता निर्मल घोष ने इस हार के लिए सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व और राजनीतिक रणनीतिकारों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम जनता और कार्यकर्ता अब पार्टी कार्यालयों का रुख नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच से दस सालों में पुराने और जमीनी स्तर के नेताओं को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है, जिसके कारण वे पार्टी सुप्रीमो से अपनी बात या परेशानियां साझा करने से वंचित रह गए।

उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि चुनाव से पहले जब एक पुराने नेता ने केंद्रीय जांच एजेंसियों (सीबीआई और ईडी) के खिलाफ अपने लंबे संघर्ष की बात शीर्ष नेतृत्व के सामने रखी, तो उनकी बातों को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि वे (शीर्ष नेतृत्व) भी इन्हीं एजेंसियों का सामना कर रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं के प्रति इस तरह के रवैये से पुराने कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा पैदा हुई है।
इसके साथ ही पुलिस प्रशासन की भूमिका की भी कड़ी आलोचना की गई। निर्मल घोष के मुताबिक, पुलिस द्वारा विपक्षी नेताओं पर अनावश्यक दबाव बनाकर उन्हें जबरन पार्टी में शामिल कराने की रणनीति ने आम जनता को काफी नाराज किया है। पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को सुलझाने के लिए कोई भी सक्षम नेता आगे नहीं आया। वरिष्ठ नेताओं को पद तो दिए गए, लेकिन उन्हें उनके अधिकारों से पूरी तरह वंचित रखा गया।
आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच, खड़गपुर में पार्टी के अंदर पनप रहा यह भारी असंतोष और गुटबाजी एक बड़े संकट का संकेत दे रही है। जमीनी नेताओं की अनदेखी भविष्य की राजनीतिक राह को और भी चुनौतीपूर्ण बना सकती है।






