महुआ मोइत्रा के खिलाफ FIR दर्ज: गोहत्या निर्देशिका पर टिप्पणी से गरमाई राजनीति

May 20, 2026 11:53 PM

पश्चिम बंगाल में गोहत्या नियंत्रण अधिनियम (1950) से जुड़े एक हालिया सरकारी निर्देश पर टिप्पणी करने को लेकर कृष्णानगर की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। स्थानीय बीजेपी नेता गोलक विश्वास ने सांसद पर ‘भड़काऊ’ टिप्पणी करने और ‘सांप्रदायिक सौहार्द’ बिगाड़ने की कोशिश का आरोप लगाते हुए करीमपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

​क्या है पूरा विवाद?

इस विवाद की शुरुआत 16 मई को महुआ मोइत्रा के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो से हुई। सांसद ने दावा किया था कि राज्य सरकार की गोहत्या संबंधी निर्देशिका उद्देश्यपूर्ण है और एक विशेष वर्ग को खुश करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप पशु बाज़ारों और पशु व्यापारियों के बीच भारी दहशत फैल गई है। इसके अलावा, मोइत्रा ने केंद्र की बीजेपी सरकार के गोमांस निर्यात और वाणिज्यिक अनुदान का मुद्दा उठाते हुए आम लोगों की रोजी-रोटी पर प्रहार करने वाली नीतियों पर भी सवाल खड़े किए।

​बीजेपी का पलटवार

मोइत्रा के इन बयानों का करीमपुर के बीजेपी विधायक समरेंद्रनाथ घोष ने कड़ा विरोध किया है। उनका स्पष्ट कहना है कि सरकारी निर्देशिका में कहीं भी पशु हाट बंद करने की बात नहीं कही गई है, बल्कि यह भारत-बांग्लादेश सीमा पर होने वाली गोतस्करी को रोकने के लिए उठाया गया एक सख्त कदम है। विधायक ने इस बात की जांच की भी मांग की है कि कहीं सांसद तस्करों की मदद तो नहीं कर रही हैं।

​विवाद की गहरी जड़ें और टीएमसी की प्रतिक्रिया

इस राजनीतिक घटनाक्रम के तार पहले की एक घटना से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। इससे पहले 9 मई को बीजेपी नेता गोलक विश्वास ने सोशल मीडिया पर महुआ मोइत्रा को ‘कालनागिनी’ की संज्ञा दी थी और इलाके में उन्हें किराए पर घर न देने का फरमान जारी किया था। इसके खिलाफ सांसद मोइत्रा ने पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। बीजेपी नेता गोलक विश्वास का दावा है कि मौजूदा विवाद उसी शिकायत का बदला है।

​वहीं, इस संवेदनशील मुद्दे पर स्थानीय टीएमसी नेतृत्व में थोड़ी असहजता देखी जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर कुछ नेताओं का मानना है कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस तरह की टिप्पणियों से बचना ही बेहतर था।

​फिलहाल, दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से सीमावर्ती करीमपुर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गरमा गया है और पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

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