





पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गुटबाजी और असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। उलुबेड़िया पूर्व से टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व और चुनावी रणनीतिकार एजेंसी आई-पैक (I-PAC) पर भ्रष्टाचार को छिपाने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।



विधानसभा से नदारद रहे कई विधायक

विधानसभा में टीएमसी विधायकों के एक विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम था, लेकिन पार्टी की অস্বिधता तब और बढ़ गई जब 80 में से 46 विधायक इस कार्यक्रम से अनुपस्थित रहे। इस प्रदर्शन में मौजूद रहने के बावजूद, ऋतब्रत बनर्जी ने अपने ही चुनाव क्षेत्र उलुबेड़िया में आवास योजना में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई और अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया।
”भ्रष्टाचार का बोझ नहीं उठाऊंगा”
ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा, “मैं 15 दिनों का समय लूंगा, लेकिन इस भ्रष्टाचार का बोझ ढोकर नहीं चलूंगा। उलुबेड़िया में आवास योजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। कई फर्जी घर आवंटित किए गए हैं। जब मैंने पार्टी को इस बारे में बताया, तो पार्टी ने मुझे चुप रहने का निर्देश दिया।”
विधायक ने आगे अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मैं बेईमान लोगों के साथ नहीं रहूंगा। मैं उलुबेड़िया नगरपालिका में नहीं बैठूंगा, बल्कि ईमानदार पार्षदों के टूटे हुए दफ्तर में ही बैठूंगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि आई-पैक की ओर से भी भ्रष्टाचार को दबाने और इस मुद्दे पर मुंह बंद रखने के लिए कहा गया था।
जहांगीर खान पर भी उठे सवाल
इससे एक दिन पहले कालीघाट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में भी कई विधायकों ने फलता से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को लेकर सवाल उठाए थे। जहांगीर ने जिस तरह से अकेले ही फलता चुनाव से हटने का फैसला किया, उसे लेकर पार्टी के अंदर काफी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मुद्दे पर भी ऋतब्रत बनर्जी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “क्या जहांगीर कोई केंद्रीय मंत्री हैं? उनका व्यवहार तो कैबिनेट मंत्रियों जैसा है। जहांगीर को पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं किया जाना चाहिए?”
पार्टी में बोलने की आजादी की मांग
इस पूरे विवाद के बीच, एंटाली के टीएमसी विधायक ने भी पार्टी के अंदर बोलने की स्वतंत्रता की मांग उठाई है। उन्होंने कहा, “पार्टी में बात करने का एक सही माहौल होना चाहिए। ऐसा माहौल जहां पार्टी के सभी लोग अपनी बात रख सकें और सबकी बात सुनी जाए।”
कुल मिलाकर, तृणमूल कांग्रेस के भीतर विधायकों का यह खुला असंतोष और भ्रष्टाचार को लेकर उठाए गए सवाल पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनते जा रहे हैं।








