





राज्य सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नए फैसले के तहत राज्य में धर्म के आधार पर दिए जाने वाले सभी प्रकार के भत्तों को तुरंत प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया गया है। इन धार्मिक भत्तों को बंद कर अब उस राशि से छात्रों के लिए ‘स्वामी विवेकानंद मेरिट स्कॉलरशिप’ (Swami Vivekananda Merit Scholarship) योजना को आज से ही शुरू किया जा रहा है। नई सरकार का मानना है कि भत्तों के क्षेत्र में धार्मिक भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर मेधावी छात्रों को सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।



शिक्षा व्यवस्था में सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर जोर

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम शिक्षा और उसके सुधार पर केंद्रित है। उन्होंने कहा:
”शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार है। वर्तमान में जो सरकारी व्यवस्था है, उस पर लगभग ९०% लोग निर्भर करते हैं। लेकिन यह व्यवस्था निजी शिक्षण संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा में कुछ पीछे छूट रही है, जिसे सुधारना हमारी प्राथमिकता है।”
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में शामिल करने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए सरकारी प्रयासों के तहत स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक सिलेबस, बेहतर लाइब्रेरी और खेलकूद की उचित व्यवस्था की जाएगी। साथ ही राज्य को ‘पीएम श्री’ (PM-SHRI) योजना से भी जोड़ा गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र को पूरी तरह से राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करना है।
महिला शिक्षा और तकनीकी शिक्षा को प्राथमिकता
सरकार ने साफ किया है कि शिक्षा के विकास में पैसों की कमी को कभी भी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के भाषणों से प्रेरणा लेने की सीख देते हुए कहा कि शिक्षा से ही चेतना जागती है और बंगाल की प्रतिभाओं का सही इस्तेमाल करके ही वास्तविक ‘सोनार बांग्ला’ का निर्माण संभव है।
इसके अलावा सरकार आगामी दिनों में निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देगी:
महिला शिक्षा को बढ़ावा: महिला कॉलेजों और बालिकाओं के स्कूलों को सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।
तकनीकी शिक्षा में सुधार: तकनीकी शिक्षा (Technical Education) की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और उपयुक्त बनाया जाएगा।
निजी संस्थानों पर नियंत्रण: प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों द्वारा ली जाने वाली फीस और अन्य शुल्कों पर नियंत्रण लाया जाएगा ताकि आम जनता को परेशानी न हो और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।
कैबिनेट के इस फैसले से यह साफ है कि नई सरकार लोक-लुभावन धार्मिक भत्तों के बजाय सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।







