




अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने के घिनौने अपराध में एक कलयुगी पिता को तमलुक की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर ५००० रुपये का जुर्माना भी लगाया है और राज्य सरकार को पीड़िता के लिए ५ लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।


मामले के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मई २०२२ में पूर्व मेदिनीपुर जिले के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। आरोप के मुताबिक, आरोपी पिता ने अपनी मानसिक रूप से अस्वस्थ पत्नी की लाचारी का फायदा उठाकर अपनी दो नाबालिग बेटियों का लंबे समय तक यौन शोषण किया। इससे पहले भी जब इसी तरह के आरोप लगे थे और स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया था, तो आरोपी दूसरे राज्य भाग गया था। बाद में वापस घर लौटकर उसने फिर से एक नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया।

लगभग चार साल तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद, १० गवाहों के बयान, जांच में जुटाए गए अहम सबूतों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर शनिवार को तमलुक की विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश ने यह अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास, ५००० रुपये जुर्माना और पीड़िता को ५ लाख रुपये मुआवजा देने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
इस मामले के सरकारी वकील ने बताया कि जांच अधिकारी के पूर्ण सहयोग से मामले की जांच सुचारू रूप से संपन्न हुई, जिससे यह न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकी। कानूनी जानकारों और समाज के एक बड़े वर्ग का मानना है कि अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में समाज को एक बेहद कड़ा संदेश देता है।







