




कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफा देने वाले तीन पूर्व राज्यसभा सांसद आज, 9 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। सुखेंदु शेखर रॉय, प्रकाश चिक बड़ाइक और सुष्मिता देव ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में आधिकारिक तौर पर पार्टी का झंडा थामा।


गौरतलब है कि भाजपा ने पहले कहा था कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए उनके दरवाजे बंद हैं। हालांकि, बाद में शमिक भट्टाचार्य ने ही स्पष्ट किया था कि “अच्छे तृणमूल नेताओं” को पार्टी में लेने पर कोई आपत्ति नहीं है।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा, “भारत की बदलती राजनीतिक स्थिति के बीच पश्चिम बंगाल में पिछले 50 वर्षों से— 34 साल सीपीआईएम (CPIM) और 15 साल तृणमूल के शासन में— संघीय ढांचे को लगातार नकारा जा रहा था। राज्य में जो राजनीति चल रही थी, उसमें केंद्र के साथ सहयोग के बजाय केवल टकराव था, जिसके कारण सारा विकास ठप हो गया था। इसी स्थिति को देखते हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए, अपने पदों से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा के इन तीन पूर्व सांसदों ने आज भाजपा का दामन थामा है।”
पार्टी के पहले के रुख और अब तृणमूल नेताओं को शामिल करने के सवाल पर भट्टाचार्य ने कहा, “अपवाद तो होते ही हैं। असाधारण घटनाओं और चरित्रों के साथ पार्टी खुद को ढाल लेती है। पार्टी का निर्णय ही अंतिम निर्णय होता है।”
उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए आगे कहा, “चोरों और जनता की संपत्ति लूटने वालों के लिए हमारे दरवाजे आज भी बंद हैं। मैंने चुनाव से पहले भी बार-बार कांग्रेस और वामपंथी मतदाताओं के साथ-साथ उन सभी लोगों से अपील की थी, जिन्होंने नौकरियां नहीं बेचीं या खरीदीं, जो सिंडिकेट का हिस्सा नहीं रहे, और जिन्होंने निर्दोष लोगों के अधिकारों को नहीं कुचला। मैंने उनसे कहा था कि बंगाल और अपनी आने वाली पीढ़ी के हित में तृणमूल को सत्ता से हटा दें।”
अंत में इन नेताओं का बचाव करते हुए शमिक भट्टाचार्य ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ये सभी गुणी और विद्वान लोग हैं। अब इनके नाम के आगे ‘दलबदलू’ या ‘टीएमसी नेता’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। हर किसी का एक अतीत होता है, एक साधु का भी अतीत होता है। इस समय सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक की एकमात्र पहचान यही है कि वे अब भाजपा के सदस्य हैं।”






