






राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक प्रमुख जनसभा के दौरान पुलिस अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव में काम करने, झूठे मामलों में कार्यकर्ताओं को फंसाने और कानून की सीमाओं का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।


वक्ता ने सीधे तौर पर पुलिस के उच्च अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में साजिश रचते हैं। चुनाव परिणामों के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया गया कि जनादेश में कथित तौर पर चोरी* और हेरफेर करके जीत हासिल की गई। इसके बाद उच्च स्तर पर बैठे राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए पार्टी के हजारों निर्दोष कार्यकर्ताओं पर झूठे मामले* दर्ज कर उन्हें परेशान किया जा रहा है।

प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा गया कि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होने पर कानून के खिलाफ जाकर काम करने वाले किसी भी पुलिस अधिकारी को बख्शा* नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “राज्य की जनता देख रही है कि कानून के नाम पर कैसा प्रहसन* और टॉर्चर* (उत्पीड़न) चलाया जा रहा है।”
इसके अलावा, अपने निजी सहायक का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया गया कि उन्हें भी झूठे मामले में फंसाकर लगभग ढाई से तीन महीने तक हिरासत में रखा गया। आरोप है कि सत्ताधारी नेताओं के इशारे पर काम करने वाले अधिकारियों को प्रमोशन और अच्छे पदों का लालच दिया जा रहा है।
अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा गया कि ऐसे सभी पुलिस अधिकारियों की एक-एक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और उनके नाम दर्ज किए जा रहे हैं। अच्छे पदों और पोस्टिंग के लालच में कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को आगामी समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।





