





हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद राज्य के 61 रुके हुए रेलवे प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’ दे दिया गया है। इसके साथ ही, राज्य में रेलवे के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की घोषणा की गई है।



रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव:

बैठक से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेलवे सेक्टर में तेजी लाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:
- स्टेशनों का आधुनिकीकरण: राज्य के 102 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय और आधुनिक सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जाएगा।
- नए फ्लाईओवर और अंडरपास: सड़क यातायात को सुगम बनाने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कुल 538 नए फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण तेजी से किया जाएगा।
- बुलेट ट्रेन का प्रस्ताव: एक नई बुलेट ट्रेन शुरू करने का भी संकल्प लिया गया है। यह बुलेट ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर लखनऊ और बनारस होते हुए राज्य के प्रमुख शहर तक चलेगी।
- नई पीढ़ी की मेट्रो ट्रेनें: अगले 4-5 वर्षों के भीतर शहर के मेट्रो यात्रियों के लिए 7 नई पीढ़ी (New Generation) की हाई-टेक मेट्रो ट्रेनें लाई जाएंगी।
रेल मंत्री का जमीनी दौरा और यात्रियों से बातचीत:
शहर में पहुंचने के बाद रेल मंत्री ने एक आम आदमी की तरह सफर किया। वे हवाई अड्डे से सीधे मेट्रो स्टेशन पहुंचे और वहां यात्रियों तथा कर्मचारियों से सीधा संवाद किया। इसके बाद उन्होंने ऑटो की सवारी भी की।
मेट्रो यात्रा के दौरान यात्रियों ने रेल मंत्री को फीडबैक दिया कि भारी सामान स्कैन करने में परेशानी होती है, इसलिए स्कैनर पर ‘स्लोप’ (ढलान) होना चाहिए। इस सुझाव पर त्वरित संज्ञान लेते हुए रेल मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तुरंत व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय पर जोर:
इस दौरान यह भी बताया गया कि पहले केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी के कारण रेलवे प्रोजेक्ट्स रुके हुए थे और राज्य के लगभग 11 करोड़ लोग रेलवे के विकास से वंचित रह गए थे। लेकिन अब आपसी सहयोग और नई नीतियों के कारण इन सभी योजनाओं को तीव्र गति से पूरा किया जाएगा।






